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पाक चुनावों पर अमरीकी चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बुश प्रशासन का कहना है कि अमरीका हर तरह से कोशिश कर रहा है कि पाकिस्तान में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों लेकिन इन सबके बावजूद कुछ हद तक धांधली होगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता. कांग्रेस के निचले सदन की एक सुनवाई में विदेश उप मंत्री रिचर्ड बाउचर का ये भी कहना था कि चुनाव के बाद ही एक स्वतंत्र न्यायपालिका बहाल करना संभव हो सकता है क्योंकि न्यायपालिका को लेकर पाकिस्तान में हमेशा से विवाद रहा है और वो एक अच्छे चुनाव से ही दूर हो सकता है. कांग्रेस की इस सुनवाई में रिचर्ड बाउचर के सामने वो हर सवाल उठाया गया जो पिछले कई महीनों से पाकिस्तान की मीडिया और राजनीतिज्ञ उठा रहे हैं. और इनमें सबसे अहम था कि क्या एक स्वतंत्र न्यायपालिका के बिना होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं. बाउचर का कहना था,'' इमरजेंसी हटने के बाद भी चुनावी प्रक्रिया में कई खामियाँ हैं जिन्हें हम दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और जितना ज़्यादा हम उन्हें दूर कर सकेंगे उतने ही बेहतर चुनाव होंगे.'' बाउचर ने बताया कि आर-पार दिखनेवाले बैलट बॉक्स का इस्तेमाल हो या भारी संख्या में चुनाव पर्यवेक्षक तैनात करने की बात हो, अमरीका हर कोशिश कर रहा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों. उनका कहना था कि इन चुनावों पर जितनी पैनी नज़र रखी जा रही है कि बहुत भारी धांधली कर पाना शायद ही मुमकिन हो लेकिन अगर इतिहास को देखें तो इसे पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता. निष्पक्ष चुनाव की कोशिश बाउचर का कहना था कि बहुत अच्छे और बहुत बुरे के पैमाने पर अगर रखा जाए तो ये चुनाव कहीं बीच में जाकर ठहरेंगे. उनका कहना था कि ज़रूरत इस बात की है कि उम्मीद नहीं छोड़ी जाए. कांग्रेस के कई नेताओं ने बुश प्रशासन की सख़्त आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जो भी किया उसमें उन्होंने उनका साथ दिया. लेकिन फिर भी आज चुनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को लंबे समय का वीसा देने की बात होती है तो उसमें आनाकानी की जा रही है, और एक्ज़िट पोल्स की तो अब भी इजाज़त नहीं दी गई है. कुछ नेताओं ने ये चिंता भी ज़ाहिर की कि अगर चुनाव सही नहीं हुए तो पाकिस्तान में कीनिया की तरह ही ख़ूनख़राबा हो सकता है. डेमोक्रेट नेता बेटि मैकोलम ने कहा कि ये मामला पाकिस्तान के स्थायित्व को ख़तरे में डाल सकता है. इस सुनवाई में एक नेता ने ये भी पूछा कि क्या आपको लगता है कि अमरीका को पाकिस्तानी जनता बेहतर नज़रों से देखेगी अगर हम मुशर्रफ़ पर दबाव डालें कि चुनाव तभी होंगे जब आप आज़ाद न्यायपालिका बहाल करेंगे. बाउचर का जवाब था कि कुछ इसे सही कहेंगे लेकिन कुछ इसे ग़लत भी कहेंगे. उनका कहना था कि पाकिस्तान में अदालतें हमेशा से राजनीतिक विवाद का मुद्दा बनी हैं और अगर चुनाव सही हो गए, तो जो नए नेता चुनकर आएंगे वो इस मामले का बेहतर हल निकाल पाएंगे. यानी कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो हर मामले पर बुश प्रशासन अब भी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के साथ खड़ा नज़र आया. उनके लिए मुशर्रफ़ की अहमियत अब भी उतनी ही है जितनी पहले थी और फ़िलहाल वाशिंगटन से शायद ही कोई ऐसा बयान सुनाई दे जो मुशर्रफ़ को कमज़ोर करे. |
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