BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 16 जनवरी, 2008 को 12:27 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
दिल्ली में बढ़ रहा है साइकिल का शौक
क्रिस मॉरिस और नलिन सिन्हा दिल्ली में साईकिल चलाते हुए
दिल्ली की सड़कों पर दुर्घटनाओं में हर वर्ष 1800 से ज़्यादा लोग मारे जाते हैं
बचपन में आपने साइकिल की सवारी ज़रूर की होगी, लुत्फ़ भी उठाया होगा, शाम के वक़्त जब लोग दफ़्तर से घर की ओर लौट रहे होते हैं तो क्या आपने दिल्ली की सड़कों पर साइकिल चलाई है या चलाने की बात सोची है?

बेशक, बचपन की ऐसी सुखद स्मृतियों को आप भूल जाऐंगें जब आपके अगल-बगल से आड़ी-तिरछी लेन को काटती हुए मोटर गाड़ियाँ और कार गुजरेंगी और
कर्णभेदी भोंपू और चिमनी से निकलती धुआँ आपको साइकिल की सवारी करने को क़तई उत्साहित नहीं करेगी.

लेकिन दिल्ली में साइकिल चलाने वाले कुछ उत्साही लोगों को अब लगता है कि फिर से साइकिल चलाने का मज़ा लेने का समय आ गया है.

साइकिल चलाने के शौकीन कुछ लोगों ने दिल्ली साइकिलिंग क्लब बनाया है जिसके अभी 250 सदस्य हैं जिसे इस वर्ष 2008 के अंत तक एक हज़ार तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है.

बढ़ता शौक

क्लब के एक सदस्य नलिन सिन्हा कहते हैं, "सबसे अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर लोग जो क्लब के सदस्य बन रहे हैं वे लोग कार की सवारी छोड़ना चाहते हैं. एक बार जब शहर में साइकिलिंग ट्रेक बन जाएगा तो बहुत सारे लोग ख़ुद-ब-ख़ुद साइकिल की सवारी करना शुरू कर देंगे."

दिल्ली में ट्रैफ़िक
दिल्ली में वाहनों की भरमार हो गई है

पर पिछले ही हफ़्ते दिल्ली में टाटा ने विश्व की सबसे सस्ती नैनो कार को काफ़ी जोश-ख़रोश के साथ बाज़ार में उतारा है, ऐसे में क्या साइकिल जैसी पुरानी कही जाने वाली सवारी लोगों को लुभा पाएगी?

नलिन सिन्हा कहते हैं, "मैं जानता हूँ कि नैनो बहुत से लोगों के कार ख़रीदने का अरमान पूरा करेगी लेकिन साथ ही निजी वाहनों के इस्तेमाल पर लगाम लगाने की सरकार की पहल को इससे नुक़सान पहुँचेगा."

दिल्ली में सड़कों पर सुरक्षित रहना एक संयोग ही कहा जाएगा. दिल्ली में तक़रीबन 1800 लोग हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और चिंता की बात ये है कि सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले लोगों में दस प्रतिशत ऐसे होते हैं जो साइकिल चलाते हैं.

जैसे-जैसे हम साइकिल चलाते हुए शाम के धुंधलके में आगे बढ़ते हैं, नलिन सिन्हा विश्वास पूर्वक कहते हैं कि आने वाले 10 वर्षों में आप देखेंगे कि दिल्ली में कार की सवारी करने वालों से कहीं ज़्यादा लोग साइकिल सवार होंगे.

मुझे विश्वास तो नहीं होता लेकिन मैं नलिन सिन्हा के विश्वास की दाद देता हूँ.

इससे जुड़ी ख़बरें
बजाज ऑटो भी अब कार बनाएगी
09 जनवरी, 2008 | कारोबार
बंगलौर में साइकिल का बढ़ता चलन
11 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस
दो पहियों पर देखी सारी दुनिया
22 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
हज का सफ़र साइकिल के ज़रिए
25 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>