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मंगलवार, 11 दिसंबर, 2007 को 16:38 GMT तक के समाचार
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बंगलौर में साइकिल का बढ़ता चलन

साइकिलिंग
भारत में साइकिल की सवारी करने वाले सड़कों पर अलग लेन बनाने की माँग कर रहे हैं
भारत में भले ही साइकिल की सवारी लाखों लोग करते हों मगर जब बंगलौर के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल जीवी दसरथी सिर पर हेलमेट, हाथों में दस्ताने और रंगीन जैकेट पहने अपनी साइकिल लेकर सड़कों पर निकलते हैं तो सबकी नज़रें उन पर टिक जाती है.

बंगलौर जैसे शहर में यह दृश्य किसी अजूबे से कम नहीं है लेकिन हाल के वर्षों में इस शहर में तेज़ी से बढ़ रही वाहनों की भीड़ और प्रदूषण ने दसरथी जैसे अनेक लोगों को घर से दफ़्तर का रास्ता तय करने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया है.

एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन बंगलौर की संकरी सड़कों पर 1000 नए वाहन उतरते हैं. शहर में प्रदूषण स्वीकृत स्तर से पाँच गुना ज़्यादा है.

पाँच साल पहले 48 वर्षीय दसरथी ने शहर में स्वच्छ हवा के अभियान से जुड़े एक मित्र के आग्रह पर कार को छोड़ कर साइकिल की सवारी करना शुरू किया था लेकिन आज वे साइकिल की सवारी के उत्साही कार्यकर्ताओं की 'गो साइकिल' नाम की एक संस्था का नेतृत्व करते हैं जो राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के लोगों से शहरी क्षेत्रों में साईकिल की सवारी करने वाले लोगों के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है.

सुविधाओं की कमी

दसरथी कहते हैं, "अब तो मेरे लिए साइकिल की सवारी एक नशा हो गया है. मैं अपनी कार का इस्तेमाल दस दिनों में महज़ एक बार करता हूँ. घर से ऑफ़िस की 15 किलोमीटर की दूरी मैं साइकिल से तय करना पसंद करता हूँ."

भारत में साइकिल की सवारी को ग़रीबी से और बड़े वाहनों की सवारी को अमीरी से जोड़कर देखा जाता है और साइकिल सवारों के लिए अलग से किसी प्रकार की लेन या अन्य सुविधाएँ मुहैया नहीं करवाई जाती है.

 अब तो मेरे लिए साइकिल की सवारी एक नशा हो गया है. मैं अपनी कार का इस्तेमाल दस दिनों में महज़ एक बार करता हूँ. घर से ऑफिस की 15 किलोमीटर की दूरी मैं साइकिल से तय करना पसंद करता हूँ.
सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल, गी वी दसरथी

बंगलौर के वारिसता टैक्नालॉजीज़ में सिस्टम आर्किटेक्ट प्रमोद कुमार कहते हैं, "छह महीनों से मैं साइकिल की सवारी गंभीरता से कर रहा हूँ. चूँकि मुझे काम से फुरसत नहीं मिल पाती कि जॉगिंग कर पाऊँ इसलिए मेरे लिए ऑफ़िस से आधे किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए साइकिल की सवारी एक तरह से शारीरिक व्यायाम हैं."

दसरथी कहते हैं, "साइकिल की सवारी दुनिया में सबसे ज़्यादा वातावरण के अनुकूल है फिर भी भारत में इसे कोई तवज्जो नहीं दी जाती है. इसे बढ़ावा देने के बदले इसका उपयोग करने वालों को हतोत्साहित किया जाता है."

'गो साइकिल' संगठन के बंगलौर के जयनगर, एम जी रोड, कमर्शियल स्ट्रीट जैसे क्षेत्रों में ख़ाली पड़ी ज़मीन का इस्तेमाल साइकिल पार्किंग के रूप में करने के लिए व्यापारी समुदायों को मनाने की कोशिश में लगा हैं.

यह संगठन शहर के नए क्षेत्रों में साइकिल सवारों के लिए अलग से ट्रैफिक सिग्नल और साइकिल लेन बनाने के लिए शहर के विकास मे लगे लोगों पर दबाव भी डाल रहा है.

यह काम कठिन भले हो पर ‘गो साइकिल’ नाउम्मीद नहीं है.

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