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रविवार, 14 जनवरी, 2007 को 13:12 GMT तक के समाचार
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अपराधियों को पकड़ेगी साइकिल सवार पुलिस

पुलिसकर्मी
देहरादून की पुलिस साइकिल से अपराध नियंत्रण का प्रयास कर रही है
देहरादून में पुलिसकर्मी इन दिनों बड़ी संख्या में साइकिल चलाते नज़र आ रहे हैं. हाँ मगर ऐसा कोई वर्जिश या व्यायाम के लिए नहीं बल्कि अपराधियों को पकड़ने के लिये चलाई जा रही एक अनूठी कसरत के लिए है.

सुबह होते ही सैकड़ों पुलिस कांस्टेबल अपने-अपने थाने से साइकिल उठाकर ड्यूटी पर निकल पड़ते हैं. इनका काम है देहरादून के हर गली-मोहल्ले और नुक्कड़ चौराहों पर नजर रखना.

कहीं भी कुछ संदिग्ध दिखे या फिर किसी अपराध की सूचना पर फौरन वहां पंहुचने की कोशिश करना.

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय गुंज्याल का कहना है, "यह साइकिल स्कवॉड उन जगहों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जहाँ जीप से पैट्रोलिंग नहीं की जा सकती. चप्पे-चप्पे पर तैनात इन पुलिसकर्मियों से जहाँ लोगों में एक सुरक्षा और विश्वास बढ़ेगा, वहीं अपराधियों में एक डर भी बैठेगा."

बढ़ता अपराध

दरअसल पिछले कुछ महीनों में देहरादून और आसपास के इलाकों में चोरी-डकैती और लूटमार की घटनाओं में काफी ज़्यादा बढ़ोत्तरी हुई है. महिलाओं के गले से चेन लूटना और बैंक से पैसे निकालकर ला रहे लोगों से बंदूक के बल पर रकम हड़प लेना जैसे आम बात हो गई है.

 यह साइकिल स्कवॉड उन जगहों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जहाँ जीप से पैट्रोलिंग नहीं की जा सकती. चप्पे-चप्पे पर तैनात इन पुलिसकर्मियों से जहाँ लोगों में एक सुरक्षा और विश्वास बढ़ेगा, वहीं अपराधियों में एक डर भी बैठेगा
संजय गुंज्याल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून

अगर हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों को छोड़ भी दें तो आंकड़ों के अनुसार 2006 में चेन स्नैचिंग, चोरी और डकैती जैसे 1007 मामले दर्ज किए गए जो इसके पहले के वर्ष में 654 थे.

इससे लोगों में काफी गुस्सा और असंतोष है. लोगों को लगता है कि पुलिस का बंदोबस्त नाकाफ़ी है और अधिकांश मामलों में अपराधियों को पकड़ने में पुलिस नाकाम ही रहती है.

अब इस साइकिल स्कवॉड के ज़रिए पुलिस शायद अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाह रही है.

लेकिन उच्च तकनीक और तेज़ रफ्तार के इस युग में जब पुलिस के भी आधुनिकीकरण और उसे हाई टेक साधनों से लैस करने की ज़रूरत पर बल दिया जा रहा है, उत्तरांचल पुलिस का ये साइकिल स्कवॉड विवाद और हास्य का केंद्र बनता जा रहा है.

हास्यास्पद प्रयास

एक स्थानीय कॉलेज में प्रोफ़ेसर डॉक्टर श्रीकृष्ण गुप्ता कहते हैं, "ये एक मज़ाक है. लूटमार करनेवाले अपराधी तो मोटरसाइकिल और कार में घूम रहे हैं. वो अपने काम को अंजाम देकर फरार हो जाएंगे और साइकिल पर सवार ये कॉंस्टेबल उनको क्या खाक पकड़ पाएंगे."

 अपराधी भले ही पकड़ में न आएँ पर इस तरह साइकिल चलाने से इन कॉंस्टेबलों की तोंद और वजन ज़रूर कम हो जाएगा
अपूर्वा प्रकाश, छात्रा

इंजीनियरिंग की छात्रा अपूर्वा प्रकाश कहती हैं, "अपराधी भले ही पकड़ में न आएँ पर इस तरह साइकिल चलाने से इन कॉंस्टेबलों की तोंद और वजन ज़रूर कम हो जाएगा."

जहाँ तक पुलिसकर्मियों की बात है अपराध को रोकना तो अपनी जगह है, उनके लिए यह एक खुशी की बात इस लिहाज से भी है कि उन्हें घर आने-जाने में सुविधा हो गई है.

नाम न बताने की शर्त पर 48 वर्षीय एक कांस्टेबल ने बताया, "सच पूछिए तो अब साइकिल चलाने की उम्र भी नहीं रही और न ही आदत. और अब तो डाकिया भी बाइक से आता है."

ग़ौरतलब है कि तीन साल पहले भी राज्य में मोटरसाइकिल स्कवॉड 'चीता' का गठन किया गया था लेकिन अपराध की रोकथाम में उसे भी ज़्यादा सफल नहीं पाया गया था.

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