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गुरुवार, 23 मार्च, 2006 को 17:44 GMT तक के समाचार
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छह साल की उम्र, फौजदारी मामला
रानी पांडे
रानी पांडे का परिवार दहशत में है
रानी पांडे की उम्र सिर्फ़ छह साल है लेकिन यह जानकार अचरज होता है कि वह एक आपराधिक मामले में अभियुक्त है.

भारत के बिहार राज्य के आरा ज़िले में पुलिस ने आरोप लगाया है कि रानी पांडे ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और अपने पिता को पुलिस की हिरासत से भागने में मदद की.

पुलिस ने रानी पांडे के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला इस सच्चाई के बावजूद दर्ज किया है कि भारतीय क़ानून में सात साल से कम उम्र के बच्चों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता.

रानी पांडे के पिता बीर बहादुर पांडे बताते हैं, "जब पुलिस ने यह मामला दर्ज किया था तब उन्होंने रानी की उम्र दस साल लिखी थी, हालाँकि रानी की असली उम्र चार साल थी. भला यह कैसे हो सकता है कि चार साल की एक बच्ची तीन पुलिसकर्मियों पर हमला करके मुझे छुड़ा सकती है."

रानी पांडे को ज़मानत अर्ज़ी पर दस्तख़त करने के स्थान पर अंगूठे का निशाना बनाना पड़ा क्योंकि वह अभी लिख नहीं सकती.

पिछले दो साल से वह ज़मानत पर रिहा है. यह भी दिलचस्प बात है कि रानी पांडे के 'अपराध' के सभी गवाह, सिर्फ़ एक को छोड़कर, आरा के पुलिसकर्मी ही हैं.

जाँच

अब आख़िरकार पुलिस यह जाँच कर रही है कि कितने साल की रानी पांडे पर किसी अपराध में आरोप निर्धारित किया जा सकता है.

आरा के पुलिस प्रमुख अजिताभ कुमार ने बीबीसी को बताया, "हम जाँच कर रहे हैं कि एक चार साल की बच्ची को भला किसी मामले में पुलिसकर्मी कैसे अभियुक्त बना सकते हैं."

अजिताभ कुमार ने बताया, "हम जाँच कर रहे हैं कि यह कहीं ग़लत पहचान का मामला तो नहीं है या फिर कहीं पुलिसकर्मियों से लापरवाही तो नहीं हुई है. जो भी इस मामले में दोषी पाए जाएंगे उनके ख़िलाफ़ ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी."

रानी पांडे
रानी पुलिस और अदालत के नाम से डरी हुई है

रानी पांडे के पिता बीर बहादुर पांडे एक ड्राइवर हैं और उन्हें कभी काम मिलता है कभी नहीं भी मिलता. उनकी आमदनी एक दिन में लगभग पचास रुपए होती है.

पुलिस ने बीर बहादुर पांडे, उनकी पत्नी मंजू देवी, बेटी रानी पांडे और कुछ अन्य परिजनों के ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज किया था.

विडंबना ये है कि बीर बहादुर स्थानी पुलिस का जीप ड्राइवर हुआ करता था और वह पुलिस का मुखबिर भी था.

ड्राइवर और मुख़बिर

बीर बहादुर का कहना है कि जब कुछ स्थानीय आपराधिक तत्वों ने उसे निशाना बनाया तो उसने पुलिस मुखबिरी छोड़ दी और एक मालवाहक ट्रक ख़रीदकर अपनी रोज़ी-रोटी कमाने का फ़ैसला किया.

इसके लिए उसने लगभग साढ़े तीन लाख रुपए का क़र्ज़ भी लिया लेकिन जब वह क़र्ज़ की क़िस्त नहीं अदा कर पाया तो क़र्ज़ देने वाली कंपनी ने उसका ट्रक ज़ब्त कर लिया.

कुछ दिन बाद उसने क़र्ज़ कंपनी से एक पत्र हासिल किया जिसमें उसे दोषमुक्त कर दिया गया था, लेकिन वह पत्र जब स्थानी परिवहन विभाग को सौंपा गया तो उसने उसे मानने से इनकार कर दिया और परिवहन विभाग की तरफ़ से पुलिस ने बीर बहादुर को परेशान करना शुरू कर दिया.

रानी की माँक मंजू देवी कहती हैं कि पुलिस ने दिसंबर 2004 में उनके घर पर छापा मारा और बहुत सा सामान उठाकर ले गए जिनें ग्यारह हज़ार रुपए की नक़दी भी थी.

बस उसी के तुरंत बाद पुलिस ने रानी और अन्य सदस्यों के ख़िलाफ़ आपराधिक आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला करके बीर बहादुर को छुड़ा लिया.

रानी पांडे बीर बहादुर के बच्चों में सबसे बड़ी है और सबसे छोटा बच्चा - गणेश 18 महीने का है.

बीर बहादुर के परिवार को अब डर है कि रानी पांडे क्या स्कूल जा पाएगी क्योंकि पुलिसकर्मी बदले की कार्रवाई कर सकते हैं.

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