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'पुलिस हिरासत में हत्या के मामले बढ़े' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि बांग्लादेश की एलीट पुलिस हिरासत में हुई साढ़े तीन सौ ज़्यादा हत्यायों के लिए ज़िम्मेदार है. ह्यूमन राइट्स वाच की रिपोर्ट में कहा गया है कि रैपिड एक्शन बटालियन यानी रैब 'सरकारी हत्यारा दस्ता' बन कर रह गया है. बंग्लादेश सरकार ने आपराधिक मामलों से निपटने के लिए वर्ष 2004 में रैब का गठन किया था. इस संगठन में पुलिस और सेना के जवानों की नियुक्ति की जाती है. मानवाधिकार संगठन पहले भी रैब के तौर तरीक़ों पर आपत्ति जता चुके है. ग़लत इस्तेमाल ह्यूमन राइट्स वाच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "रैब के काम करने का तरीक़ा ग़ैरक़ानूनी है और उस देश के लिए तो शर्मनाक कहा जाएगा जहाँ के एक व्यक्ति को हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार मिला है." रिपोर्ट कहती है, "बंग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी जनवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक फ़ायदे के लिए रैब का इस्तेमाल कर सकती है." बीएनपी ने इस रिपोर्ट पर कोई शुरुआती प्रतिक्रिया नहीं दी है. बीएनपी नेता बेग़म ख़ालिदा ज़िया ने पाँच साल का कार्यकाल पूरा होने पर 28 अक्तूबर को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उसके बाद राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद कार्यवाहक सरकार का संचालन कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेश:बदल सकती है चुनाव की तारीख़13 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सेना की तैनाती गंभीर चिंता का विषय'12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में चार मंत्रियों का इस्तीफ़ा11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस विरोध प्रदर्शनों के कारण सेना तैनात10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में सेना तैनात की गई09 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में 'टल' सकता है चुनाव07 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में 'चक्का जाम' समाप्त04 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में झड़पें, एक व्यक्ति मारा गया03 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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