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सोमवार, 22 जनवरी, 2007 को 17:28 GMT तक के समाचार
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दो पहियों पर देखी सारी दुनिया

प्रशांत गोलवलकर
प्रशांत मोटरसाइकिल से पूरा भारत घूम चुके हैं
लीक से हटकर ज़िंदगी जीने के लिए लोग क्या कुछ नहीं कर बैठते. मध्य प्रदेश के प्रशांत गोलवलकर तो साइकिल से ही दुनिया घूमने निकल पड़े.

आज प्रशांत दुनिया के क़रीब 86 देशों में साइकिल के ज़रिए लगभग डेढ़ लाख़ किलोमीटर का सफ़र पूरा कर चुके हैं.

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के रहने वाले प्रशांत अपने देश भारत में भी मोटर साइकिल से क़रीब साढ़े सात लाख किलोमीटर का सफ़र कर चुके हैं.

 आम लोगों से अलग तरह की जिंदगी जीना चाहता था. दुनिया को करीब से जानना चाहता था इसलिए साइकिल और मोटर साइकिल से देश-विदेश का सफर करता हूँ
प्रशांत गोलवलकर

इनकी एक ख़ास बात ये भी है कि ये एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए आमतौर पर मोटरसाइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं.

प्रशांत गोलवलकर अपनी इस ख़ानाबदोश जिंदगी के बारे में बताते हैं,"आम लोगों से अलग तरह की जिंदगी जीना चाहता था. दुनिया को करीब से जानना चाहता था इसलिए साइकिल और मोटर साइकिल से देश-विदेश का सफर करता हूँ."

बैंक की नौकरी से वर्ष 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने वाले प्रशांत ने पहली बार 12 फरवरी 1985 को 28 देशों की यात्रा से शुरु की.

इसकी शुरुआत उस वक्त के मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने करवाई. उस वक़्त संबंध ख़राब होने की वजह से वे पाकिस्तान नहीं जा पाए थे और कुवैत से अपनी यात्रा शुरू की थी.

यात्रा

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे नहीं देखा. प्रशांत 1988-89 में दक्षिण-पूर्व एशिया के 12 देश, 1991 में आस्ट्रेलिया सहित प्रशांत क्षेत्र के तीन देश, 1993 में अफ्रीका के 30 देश, 1995 में अमरीका के दोनों महाद्वीपों के 15 देश और 2005 में चीन की यात्रा कर चुके हैं.

प्रशांत गोलवलकर
दुनिया देखने की ललक आज भी बाक़ी है

उनके मुताबिक दुनिया के दो बड़े देशों जापान और रूस में उनका अब तक जाना नहीं हो पाया है.

प्रशांत हमेशा सूरज निकलने के बाद और डूबने से पहले ही यात्रा करते हैं. उसके बाद वो किसी जगह रुककर आराम करते हैं.

अगर वो साइकल पर सवार होते हैं तो आम तौर पर एक दिन में 100 किलोमीटर चलते हैं और मोटर साइकिल की सवारी करने पर लगभग ढाई सौ से तीन सौ किलोमीटर का सफर पूरा करते है.

शादी नहीं करने की वजह से परिवार की ज़िम्मेदारी इन पर कभी नही रही. यही वजह है कि इन्हें कभी भी एक जगह से दूसरी जगह जाने में दिक्कत नही होती.

हालाँकि इन्हें सफर के दौरान पैसे की समस्या का सामना करना पड़ता है, इसी वजह से ग्रीस में चालीस दिन तक इन्होनें एक फैक्ट्री में काम किया.

विदेशों में पूरे सफर के दौरान युगोस्लाविया को छोड़ कर वो कभी भी किसी देश के होटल में नही ठहरे.

ये पूछने पर कि क्या सफर में उन्हें कभी बहुत परेशानी हुई, गोलवलकर कहते हैं,"एक बार कनाडा में एक ही दिन में उनकी साइकिल आठ बार पंचर हुई, उस दिन उन्हें उसका ट्यूब बदलवाना पड़ा."

गोलवलकर का मानना है कि चोरी और लूट जैसी चीजें सिर्फ हिन्दुस्तान और दूसरे ग़रीब देशों में ही नहीं होती हैं. उन्हें फ्रांस और इटली जैसे देशों में भी अपना सामान खोना पड़ा.

उनका कहना है कि भविष्य में भी वो अपना वक़्त इस तरह की यात्राओं में गुज़ारना चाहते हैं.

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