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शुक्रवार, 17 नवंबर, 2006 को 14:03 GMT तक के समाचार
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सॉफ़्टवेयर इंजीनियर का नाम लिम्का बुक में
जगदीप सिंह दाँगी
जगदीप सिंह दाँगी सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं
मध्य प्रदेश में विदिशा ज़िले के कंप्यूटर इंजीनियर जगदीप सिंह दाँगी का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है.

जगदीप दाँगी को यह उपलब्धि दुनिया के पहले हिंदी इंटरनेट सॉफ़्टवेयर आई-ब्राउजर++ (हिंदी-एक्सप्लोरर) को विकसित करने के लिए मिली है.

आई-ब्राउजर++ (हिंदी-एक्सप्लोरर) का संपूर्ण इंटरफ़ेस पूरी तरह हिंदी भाषा (देवनागरी लिपि) में है. इसकी सहायता से कोई भी साक्षर हिंदी भाषी व्यक्ति इसका उपयोग अपनी भाषा में आसानी से कर सकता है.

आई-ब्राउजर++ में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुविधा अनुवाद की है, जिसकी मदद से वेब-पेज पर मौजूद अंग्रेज़ी शब्द का न केवल हिंदी में अर्थ और उच्चारण जाना जा सकता है, बल्कि उच्चारण सहित लगभग सभी समानार्थी शब्द भी देवनागरी लिपि में आ जाते हैं.

विशेषता

आवश्यकता सिर्फ़ होती है उस शब्द पर माउस से क्लिक करने की. इसके अलावा आई-ब्राउजर++ में और भी अन्य खूबियाँ हैं.

जैसे एक साथ कई फ़ाइल खोलने की (उसी विंडो या अन्य विंडो में), एक साथ कई फ़ाइल को सुरक्षित करने की, एक साथ कई फ़ाइल सर्च कर अपने आप एक के बाद एक फ़ाइल खोलने की.

इसमें हिंदी यूनिकोड आधारित पाठ लिखने, उसे इंटरनेट से सर्च करने, हिंदी ई-मेल लिखने और भेजने की सुविधाएँ प्रमुख हैं.

इस सॉफ़्टवेयर में अनुवाद की सुविधा तो मिलती ही है, लगभग 38,500 शब्दों का शब्दकोश भी इसमें है, जिसकी सहायता से अंग्रेज़ी भाषा के वेब-पेज को हिंदी में समझने में सहायता मिलती है.

यही नहीं इसके शब्दकोश में आप अतिरिक्त शब्दों को सम्मिलित कर इसे और भी समृद्ध बना सकते हैं.

मई में जगदीप दाँगी को लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड के कार्यालय गुड़गांव में आमंत्रित किया गया था.

यहाँ उन्होंने अपने सॉफ़्टवेयर का प्रदर्शन लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड की संपादक विजया घोष और अन्य पदाधिकारियों के सामने किया था. अब लिम्का बुक में नाम दर्ज होने संबंधित प्रमाण पत्र जगदीप दाँगी को मिला है.

विदिशा के इंजीनियरिंग महाविद्यालय से 2001 में कम्प्यूटर इंजीनियर की उपाधि प्राप्त करने वाले दाँगी जब सात वर्ष के थे, उन्हें पोलियो हो गया और इलाज के क्रम में एक पैर के साथ-साथ एक आँख भी ख़राब हो गई.

लिम्का बुक में नाम दर्ज होने के बाद उन्होंने बताया कि चार वर्ष की मेहनत के बाद उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है.

दाँगी ने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अपने निवास पर ही उन्होंने अपने 'भाषा-सेतु' प्रोजेक्ट के तहत हिंदी सॉफ़्टवेयर तैयार किया है.

उनके इस कार्य को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की सूचना तकनीक से जुड़ी अनेक पत्र-पत्रिकाओं ने सराहा है.

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