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'चीन के साथ संबंधों का नया दौर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तीन दिवसीय यात्रा पर चीन पहुँच चुके हैं. रविवार को भारतीय प्रधानमंत्री चीन की उन जगहों का दौरा किया जहाँ ओंलंपिक खेल होने वाले हैं. चीन पहुँचने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत-चीन रिश्तों की वैश्विक स्तर पर बहुत अहमियत बन चुकी है. सोमवार और मंगलवार को चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और राष्ट्रपति हू जिंताओ से मिलेंगे. चीन के नेतृत्व से मुलाक़ातों से पहले प्रधानमंत्री सिंह ने कहा है कि भारत और चीन के संबंधों का नया दौर शुरु होने जा रहा है. प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह पहली बार चीन के दौरे पर हैं और पाँच साल में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है. मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर बातचीत होगी. भारतीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है. हालांकि यह भी तथ्य है कि 1962 के युद्ध के बाद से शुरु हुआ सीमा विवाद अब भी दोनों देशों के बीच संदेह का कारण बना हुआ है. अब दोनों देश एक दूसरे से संबंध प्रगाढ़ बनाने की बात कर रहे हैं लेकिन इसमें चीन और पाकिस्तान के रिश्ते आड़े आते हैं. उल्लेखनीय है कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य समझौता है और चीन ने पाकिस्तान को हथियार देता है और उसी ने पाकिस्तान को मिसाइल तकनीक उपलब्ध करवाई है. मुलाक़ातें
मनमोहन सिंह चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ रविवार को रात्रि भोज पर बातचीत करेंगे. इसके बाद सोमवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी. साथ ही उनकी राष्ट्रपति हू जिंताओ से भी मुलाक़ात होगी. चीन के साथ सीमा विवाद पर प्रमुखता से बातचीत होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि आर्थिक संबंधों के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है क्योंकि प्रधानमंत्री के साथ एक शीर्ष व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी गया है. प्रधानमंत्री को रविवार को जाना था लेकिन दिल्ली में बदलते मौसम को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शनिवार की रात ही रवाना होने का फ़ैसला किया. प्रधानमंत्री सिंह ने यात्रा शुरु करने से पहले कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश है और वह भारत की पूर्वोन्मुख नीति के केंद्र में है. उनका कहना था कि अप्रैल, 2005 में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने शांति एवं समृद्धि के लिए सामरिक भागीदारी स्थापित की थी. नवंबर, 2006 में राष्ट्रपति हू जिंताओ की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के 10 सूत्री आधार पर सहमति हुई थी. मनमोहन सिंह का कहना था,'' मुझे चीनी नेतृत्व के साथ सभी पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है. हम व्यापक आर्थिक संबंधों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कला, संस्कृति, शिक्षा, रक्षा और सुरक्षा के अलावा जनता के स्तर पर संपर्क को बढ़ाने की प्रक्रिया की शुरूआत कर सकते हैं.'' 'घुसपैठ' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने स्वीकार किया है कि चीन की सेना कभी कभी भारत की सीमा में घुस जाती है. उनका कहना था कि कि इन मुद्दों को स्थापित तंत्र के जरिए निबटा दिया जाता है. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा,'' कभी कभी घुसपैठ होती है. लेकिन ऐसे सभी मामलों पर ध्यान दिया जाता है. इसके हल के लिए स्थापित तंत्र हैं.'' उन्होंने कहा कि इसको लेकर चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि ऐसे मुद्दों को निबटाने के लिए भारत और चीन द्वारा स्थापित तंत्र बढ़िया काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी माना था कि भारत की सीमा से लगे चीन के हिस्से में भारतीय हिस्से की तुलना में ढाँचागत सुविधाओं का ज़्यादा विकास हुआ है. |
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