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मनमोहन तीन दिवसीय चीन यात्रा पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार से अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर बातचीत होगी. प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह पहली बार चीन के दौरे पर हैं. मनमोहन सिंह चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ रविवार को रात्रि भोज पर बातचीत करेंगे. इसके बाद सोमवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी. साथ ही उनकी राष्ट्रपति हू जिंताओ से भी मुलाक़ात होगी. चीन के साथ सीमा विवाद पर प्रमुखता से बातचीत होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि आर्थिक संबंधों के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है क्योंकि प्रधानमंत्री के साथ एक शीर्ष व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी जा रहा है. प्रधानमंत्री को रविवार को जाना था लेकिन वो दिल्ली के ख़राब मौसम को देखते हुए शनिवार रात को ही रवाना हो रहे हैं. रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा चीन को भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी है और हम चीन के साथ अपने संबंधों की मजबूत बनाना चाहते हैं. घुसपैठ प्रधानमंत्री सिंह का कहना था कि अप्रैल, 2005 में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने शांति एवं समृद्धि के लिए सामरिक भागीदारी स्थापित की थी. नवंबर, 2006 में राष्ट्रपति हू जिंताओ की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के 10 सूत्री आधार पर सहमति हुई थी. मनमोहन सिंह का कहना था,'' मुझे चीनी नेतृत्व के साथ सभी पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है. हम व्यापक आर्थिक संबंधों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कला, संस्कृति, शिक्षा, रक्षा और सुरक्षा के अलावा जनता के स्तर पर संपर्क को बढ़ाने की प्रक्रिया की शुरूआत कर सकते हैं.'' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने स्वीकार किया है कि चीन की सेना कभी कभी भारत की सीमा में घुस जाती है. उनका कहना था कि कि इन मुद्दों को स्थापित तंत्र के जरिए निबटा दिया जाता है. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा,'' कभी कभी घुसपैठ होती है. लेकिन ऐसे सभी मामलों पर ध्यान दिया जाता है. इसके हल के लिए स्थापित तंत्र हैं.'' उन्होंने कहा कि इसको लेकर चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि ऐसे मुद्दों को निबटाने के लिए भारत और चीन द्वारा स्थापित तंत्र बढ़िया काम कर रहे हैं. |
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