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गुरुवार, 29 नवंबर, 2007 को 12:20 GMT तक के समाचार
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अब मुशर्रफ़ असैनिक राष्ट्रपति
परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेना की कमान अपने विश्वस्त सहयोगी जनरल कियानी को सौंपी है
परवेज़ मुशर्रफ़ ने बुधवार को सेना प्रमुख का पद छोड़ने के एक दिन बाद गुरुवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति पद के दूसरे कार्यकाल की शपथ ली और अब वह असैनिक राष्ट्रपति रहेंगे.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने अंतरिम संविधान के तहत शपथ ग्रहण की.

इमरजेंसी लागू किए जाने के बाद पुनर्गठित सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर ने उन्हें पाँच साल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई.

परवेज़ मुशर्रफ़ सैनिक कमान बुधवार को ही छोड़ चुके हैं और गुरूवार को राष्ट्रपति पद की शपथ के लिए काली शेरवानी पहनकर आए, आमतौर पर वह सैनिक वर्दी पहनना पसंद करते थे.

शपथ ग्रहण समारोह पाकिस्तान के राष्ट्रगान और क़ुरआन की तिलावत के साथ शुरू हुआ.

जिस समय उनका शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था तो लाहौर में लगभग 200 वकीलो ने विरोध प्रदर्शन भी किए जिनमें पुलिस के साथ उनकी हिंसक झड़पें हुई.

पुलिस ने प्रदर्शनकारी वकीलों को तितर-बितर करने के लिए लाठियाँ चलाईं. लगभग दस वकील ज़ख़्मी भी हो गए.

लाहौर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद का कहना था, "हमारी लड़ाई राजनीति में सेना के हस्तक्षेप को हमेशा के लिए समाप्त करने की है."

परवेज़ मुशर्रफ़ ने क़रीब 46 साल सेना में रहने के बाद बुधवार, 28 नवंबर को सेनाध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे दिया जिसके लिए उन पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव था.

संवाददाताओं का कहना है कि आने वाले समय में उनके नेतृत्व को काफ़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि इमरजेंसी की वजह से हालात काफ़ी पेचीदा बन चुके हैं.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि इमरजेंसी की वजह से धर्मनिर्पेक्ष मध्यवर्ग अलग-थलग पड़ गया है और इस्लामी चरमपंथ ने काफ़ी ताक़त हासिल कर ली है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर पाकिस्तान के तमाम विपक्षी दल एकजुट हो जाते हैं तो परवेज़ मुशर्रफ़ के सामने ख़ासी मुश्किल खड़ी हो सकती है.

अगर ऐसा नहीं होता है तो परवेज़ मुशर्रफ़ को विपक्षी दलों से अलग-अलग जूझना पड़ सकता है और जो भी हो, परवेज़ मुशर्रफ़ को अब राजनीतिक रस्साकशी में उलझे रहना होगा.

'छलावा'

हाल ही में निर्वासन ख़त्म कर पाकिस्तान लौटे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने मुशर्रफ़ के इस क़दम को 'छलावा' बताया है.

परवेज़ मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ 46 साल तक सेना में रहे हैं

उनका कहना था, "पाकिस्तान का संविधान इस तरह की इजाज़त नहीं देता. सबसे पहले तो इमरजेंसी को हटाना चाहिए."

उधर एक और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है, "ये हमारी लड़ाई की शुरुआती जीत है क्योंकि हम मुशर्रफ़ से सेना प्रमुख का पद छोड़ने की माँग करते आ रहे थे."

गुरुवार को ही विपक्षी दलों के गठबंधन की बैठक होने वाली है जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा.

पृष्ठभूमि

ऐसी संभावना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद राष्ट्र को संबोधित करेंगे और इसी में इमरजेंसी ख़त्म करने के बारे में समयसीमा की घोषणा हो सकती है.

मुशर्रफ़ ने छह अक्तूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नतीजे घोषित करने से रोक दिया था.

लेकिन तीन नवंबर को आपातकाल की घोषणा के साथ ही मुशर्रफ़ ने उन जजों को निलंबित कर दिया जो उनके राष्ट्रपति चुने जाने को चुनौती दे रहे थे.

इसके बाद उन्होंने नए जजों की नियुक्त की जिन्होंने उनकी जीत को जायज़ ठहरा दिया.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने आठ जनवरी 2008 को संसदीय चुनाव कराने की घोषणा की थी और चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

परवेज़ मुशर्रफ़क्या क्या विकल्प
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