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बुधवार, 28 नवंबर, 2007 को 14:24 GMT तक के समाचार
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मुशर्रफ़ ने सेना की कमान छोड़ी
परवेज़ मुशर्रफ़ जनरल कियानी को कमान सौंपते हुए
जनरल अशफ़ाक कियानी को सेनाध्यक्ष की बैटन सौंपते परवेज़ मुशर्रफ़
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने बढ़ते अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव के बीच बुधवार को सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया है.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेनाध्यक्ष का पद जनरल अशफ़ाक कियानी को सौंप दिया है. उन्हें परवेज़ मुशर्रफ़ का क़रीबी समझा जाता है.

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ क़रीब नौ साल तक पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे हैं.

रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में परंपरागत सैन्य समारोह में परवेज़ मुशर्रफ़ ने औपचारिक रूप से जनरल कियानी को सेना की कमान सौंपी.

संभावना है कि गुरूवार को परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति पद के अगले कार्यकाल की शपथ लेंगे.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्दी छोड़ने की औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि सेना के साथ 46 साल रहने के बाद वे सेना को छोड़ ज़रुर रहे हैं लेकिन उनका 'दिल और दिमाग सेना के साथ ही रहेगा'.

इसके साथ ही पाकिस्तान में आठ साल पुराना सैन्य शासन समाप्त हुआ माना जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पाकिस्तान के विपक्षी दलों की एक प्रमुख माँग थी कि परवेज़ मुशर्रफ़ सिर्फ़ एक ही पद पर रह सकते हैं या तो राष्ट्रपति पद पर रहें या फिर सेनाध्यक्ष के पद पर.

लाहौर से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस क़दम के बाद भी अभी यह तय नहीं है कि विपक्षी नेता संतुष्ट हो जाएँगे क्योंकि असैनिक राष्ट्रपति बनने के बाद भी परवेज़ मुशर्रफ़ के पास असीमित शक्तियाँ रहेंगी जिनमें चुनी हुई सरकार को बर्ख़ास्त करने का अधिकार भी शामिल है.

इसके अलावा अभी देश में इमरजेंसी लागू है और उनके ही नेतृत्व में आम चुनाव होने हैं.

समारोह

सेनाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी जनरल कियानी को सौंपने का समारोह परवेज़ मुशर्रफ़ के सलामी लेने के साथ शुरू हुआ.

जब वे सलामी ले रहे थे तो सेना का बैंड धुनें बजा रहा था.

इसके बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने सैन्य साथियों के प्रति एक भावुक संबोधन भी दिया.

भावुक वक्तव्य
 मुझे इसका अफ़सोस ज़रुर है लेकिन यह ज़िंदगी का निज़ाम है. लोग आते रहते हैं और उन्हें जाना होता है. हर चीज़ फ़ानी है
परवेज़ मुशर्रफ़

उन्होंने कहा, "46 साल वर्दी में रहने के बाद मैं फ़ौज को अलविदा कह रहा हूँ. फ़ौज मेरी ज़िंदगी है और मेरा जुनून रही है."

उन्होंने कहा कि उनके दिल में जो गुज़र रही है उसे शब्दों में बयान करना कठिन है. उन्होंने सेना से अपने अलग होने को एक परिवार से अलग होने की तरह बयान किया.

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मुझे इसका अफ़सोस ज़रुर है लेकिन यह ज़िंदगी का निज़ाम है. लोग आते रहते हैं और उन्हें जाना होता है. हर चीज़ फ़ानी है. मैं जो कुछ हूँ फ़ौज के कारण हूँ"

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का तख़्तापलट करके सत्ता पर क़ब्ज़ा किया था.

उन्होंने पाकिस्तानी सेना की जमकर तारीफ़ की और कहा, "मेरी ख़ुशक़िस्मती है कि मैंने दुनिया की बेहतरीन फ़ौज को कमांड किया है."

परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि जो लोग फ़ौज पर उँगली उठाते हैं, उन्हें समझ नहीं है.

नए सेनाध्यक्ष की तारीफ़ करते हुए मुशर्रफ़ ने कहा, "मैं जानता हूँ कि जनरल कियानी एक बेहतरीन सिपाही हैं और मुझे यक़ीन है कि उनके कमांड में फ़ौज पहले से बेहतर होगी और बुलंदियों को छुएगी."

इसके बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेनाध्यक्ष का बैटन जनरल कियानी को सौंप कर प्रभार सौंपने की औपचारिकता पूरी की.

समारोह में कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद मियाँ सूमरो सहित कई बड़े राजनीतिक नेता और सेना के प्रमुख अधिकारी मौजूद थे.

नई भूमिका

हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ अब भी राष्ट्रपति हैं लेकिन सेना की वर्दी छोड़ने के बाद वे संभवतः गुरुवार को असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ क़रीब 46 वर्ष पाकिस्तानी सेना में रहे हैं

1999 के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए यह नई भूमिका होगी क्योंकि अभी तक वह राष्ट्रपति होने के साथ-साथ सेनाध्यक्ष भी थे.

परवेज़ मुशर्रफ़ इस नई भूमिका में ऐसे समय में आने वाले हैं जब पाकिस्तान में राजनीतिक उथलपुथल चल रही है और संसदीय चुनाव की तारीख़ें घोषित की जा चुकी हैं.

आठ जनवरी 2008 को होने वाले इन चुनावों के लिए दो पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ वापस लौट चुके हैं जो निर्वासित ज़िंदगी बिता रहे थे.

हालांकि अभी यह चर्चा चल ही रही है कि वे इन चुनावों में हिस्सा लेंगे भी या नहीं. वैसे उनकी पार्टियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है.

राजनीतिक दल इमरजेंसी हटाने और इमरजेंसी के पहले के सुप्रीम कोर्ट को बहाल करने की माँग कर रहे हैं.

ख़बरों के अनुसार सैन्य प्रमुख का पद छोड़ देने के बावजूद मुशर्रफ़ की सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना पर ही रहेगी.

असैनिक राष्ट्रपति होने के बावजूद मुशर्रफ़ अपने सैन्य कर्मचारियों को बरक़रार रख सकेंगे.

जनरल मुशर्रफ़ पर सेना प्रमुख का पद छोड़ने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव था.

परवेज़ मुशर्रफ़मुशर्रफ़ का मुश्किल दौर
शायद परवेज़ मुशर्रफ़ इस समय अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुज़र रहे हैं.
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