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पाक के परमाणु हथियारों पर अमरीका चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हाल में भारत में इस तरह की मीडिया रिपोर्टें छपीं कि अगर पाकिस्तान में अराजकता फैली और राजनीतिक स्थिति बिगड़ी तो परमाणु हथियारों का क्या होगा? परमाणु हथियार अगर ग़लत हाथों में पड़े तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. चरमपंथियों के निशाने पर तीन देश होंगे – अमरीका, इसराइल या भारत. अभी पाकिस्तान में स्थिति इतनी गंभीर नहीं है लेकिन परमाणु हथियारों के मामले में अमरीका हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है. बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता गॉर्डन करेरा का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने वाले अमरीकी सुरक्षा अधिकारियों से बात की है. वो कहते हैं कि अमरीका की ओर से एक बेहद वरिष्ठ अफ़सर से उन्होंने बात की तो उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अगर उन्हें कोई सिर्फ़ एक सबसे बड़ी चिंता की वजह पूछे तो वो कहेंगे कि वो है पाकिस्तान के परमाणु हथियार का ग़लत हाथों में पड़ना और इसके बारे में सोचकर ही वो कई बार रात में सो नहीं पाए हैं. जानकार कहते हैं कि पाकिस्तान में ऐसा होने की संभावना कम है क्योंकि सेना के एक छोटे हिस्से को ही इसकी सही जानकारी है और वहाँ कड़ी सुरक्षा है. पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा से सेना के बाहर किसी के लिए परमाणु हथियारों पर कब्ज़ा करना लगभग असंभव है. लेकिन चिंता ये है कि अगर सेना के अंदर ही कोई विद्रोह कर दे तो क्या होगा? गॉर्डन करेरा कहते हैं, “अमरीकी इस बात पर खुलकर बोलते नहीं हैं लेकिन उनके पास एक योजना है. बुरी से बुरी स्थिति वो होगी अगर पाकिस्तानी सेना के किसी ऐसे जूनियर अफ़सर ने तख्तापलट कर दिया जो इस्लामी चरमपंथियों के क़रीब है तो अमरीका क्या करेगा? ऐसी स्थिति से निपटने के लिए हाल के महीनों में काफ़ी विचार विमर्श हुआ है.” और क्या है ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अमरीकियों की ये योजना? इस बार ये बहस अमरीका में तेज़ हैं और सिर्फ़ मीडिया में नहीं नीति निर्धारकों के बीच भी.
बीबीसी संवाददाता गॉर्डन करेरा कहते हैं, “ ऐसे समय में अमरीकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ तुरंत परमाणु हथियार पर कब्ज़ा करने के लिए उन ठिकानों पर जाएगी जहाँ ये हथियार रखे हैं. लेकिन मैंने जब अमरीकी अधिकारी से पूछा कि क्या किसी और के हाथ ये हथियार लगें उससे पहले अमरीकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ वहाँ पहुँच पाएँगी, इसकी गारंटी है? अमरीकी अधिकारी ने कहा – शायद नहीं और इसीलिए अमरीका इतना चिंतित है. ” यहाँ एक बात समझना ज़रूरी है – कि अभी पाकिस्तान में स्थिति इतनी गंभीर नहीं है और ये सिर्फ़ एक तैयारी है कि बुरी से बुरी स्थिति में परमाणु हथियारों से क्या संकट पैदा हो सकता है. लेकिन ये एक चिंता का विषय तो है. अगर ऐसी स्थिति आई तो क्या अमरीका राजनीतिक तौर पर ऐसा करने की स्थिति में है, क्या पाकिस्तान सरकार अमरीकी सेना को ऐसा करने की इजाज़त देगी? गॉर्डन करेरा कहते हैं कि अमरीकी सेनेट को भी यही चिंता थी इसीलिए वो संबंधित सुरक्षा अधिकारियों से पूछते रहे पूछते रहे और अधिकारी इस प्रश्न का जवाब देने से कतराते रहे क्योंकि ये बातें अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों के लिए बहुत संवेदनशील हैं. लेकिन आख़िरकार उन्होंने माना कि ये चिंता उन्हें भी है और वो स्पेशल फ़ोर्सेज़ को भेजने का विकल्प खुला रख रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'भारत-पाक भी संधि के दायरे में आएँ'03 मई, 2005 | भारत और पड़ोस क़दीर ख़ान पर अमरीकी रिपोर्ट25 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस परमाणु विवाद में मुशर्रफ़ का भी नाम03 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस 'डॉ क़दीर ने परमाणु सूचनाएँ बाँटने की बात मानी'02 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में परमाणु तकनीक विशेषज्ञों से पूछताछ22 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी मिसाइलें सेना को | भारत और पड़ोस पाक वैज्ञानिकों में भगदड़ | भारत और पड़ोस विशेषज्ञों की नज़र अलग-अलग | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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