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परमाणु विवाद में मुशर्रफ़ का भी नाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के जाने-माने वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान पर परमाणु जानकारी लीक करने के आरोपों के सिलसिले में तरह-तरह की ख़बरें सामने आ रही हैं. अमरीकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार क़दीर ख़ान ने जाँचकर्ताओं से कहा है कि उन्होंने उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों के विकास में सहायता दी थी और परवेज़ मुशर्रफ़ समेत देश के बड़े सैनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी थी. उधर पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मिर्जा असलम बेग़ ने बीबीसी से कहा है कि ये हो सकता है कि पाकिस्तानी वैज्ञानिकों ने ईरान और लीबिया के परमाणु कार्यक्रम में भूमिका निभाई हो. और पाकिस्तान की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमाते इस्लामी का दावा है कि डॉक्टर क़दीर ख़ान ने देश की परमाणु जानकारी कुछ अन्य देशों को देने के बारे में कोई इक़बालिया बयान नहीं दिया है. जमाते इस्लामी का कहना है कि उनके नेता क़ाज़ी हुसैन अहमद और डॉक्टर ख़ान के बीच टेलीफ़ोन पर बातचीत हुई है जिसमें पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक ने ऐसा कोई भी बयान देने से इनकार किया है. मुशर्रफ़ वाशिंगटन पोस्ट के लिए लिखने वाले पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार कामरान ख़ान ने बताया कि डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान ने सीधे-सीधे अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में कुछ नहीं कहा है और ये रिपोर्ट डॉक्टर ख़ान से बात करने वाले कुछ लोगों से ली गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है. कामरान ख़ान ने बताया,"डॉक्टर ख़ान ने सीधे मुशर्रफ़ पर इल्ज़ाम नहीं लगाया है मगर वे कहते हैं कि जो उनका काम था वो ज़रूर मुशर्रफ़ की जानकारी में रहा होगा". उनका कहना था कि पाकिस्तान में अक्सर जाँच के दौरान लिए गए बयान अदालत में दिए जाने वाले बयानों से अलग होते हैं. कामरान ख़ान के अनुसार स्थिति तभी स्पष्ट हो पाएगी जब डॉक्टर ख़ान अदालत में ख़ुद कुछ बोलेंगे. माफ़िया डॉक्टर ख़ान पर 80 और 90 के दशक में लीबिया, उत्तर कोरिया और ईरान को परमाणु जानकारी लीक करने के आरोप लग रहे हैं. जनरल मिर्ज़ा असलम बेग इस दौरान पाकिस्तान की सेना के प्रमुख थे और हाल में उन्होंने बीबीसी को एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि हो सकता है पाकिस्तानी वैज्ञानिकों ने ईरान और लीबिया के परमाणु कार्यक्रम में भूमिका निभाई हो. जनरल बेग ने कहा,"1976 से ही हमारे वैज्ञानिकों को परमाणु कार्यक्रम पूरा करने के लिए सरकार की तरफ़ से निर्देश दिए गए थे. तभी से ये वैज्ञानिक हथियार और टेक्नोलोजी माफिया के साथ संपर्क बनाए हुए थे और जहाँ से जो मिल रहा था इकठ्ठा कर रहे थे." उन्होंने कहा कि हो सकता है उन्होंने अपने लीबियाई और ईरानी मित्रों को भी ऐसे लोगों के बारे में जानकारी दी हो. जमाते इस्लामी के नेता काज़ी हुसैन अहमद ने कहा,"मामला चाहे जो भी हो, लोग अब्दुल कदीर खान के साथ हैं. लोग मानते हैं कि अमरीकी दबाव के तहत डॉक्टर ख़ान को अपमानित किया जा रहा है. मैं ही नहीं इससे सारी आवाम, पूरा देश नाराज़ है." काज़ी हुसैन अहमद ने पाकिस्तान सरकार की नीयत पर शक ज़ाहिर करते हुए डॉक्टर ख़ान के ख़िलाफ़ कार्रवाई को ग़लत करार दिया है. |
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