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इमरजेंसी हटाने की तारीख़ 16 दिसंबर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि 16 दिसंबर को इमरजेंसी हटा ली जाएगी और चुनाव पूर्व घोषणा के अनुसार आठ जनवरी को ही कराए जाएंगे और चुनावों को किसी भी सूरत में नहीं टाला जाएगा. गुरूवार को असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि सरकार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव चाहती है. उन्होंने कहा कि चुनावों की निगरानी के लिए जो देश चाहे और जितने चाहे, पर्यवेक्षक भेज सकता है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने बुधवार, 28 नवंबर को सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने के एक दिन बाद राष्ट्रपति पद के दूसरे कार्यकाल की शपथ ग्रहण की. इस मौक़े पर परवेज़ मुशर्रफ़ ने दोहराया कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि यह एक भावनापूर्ण और ऐतिहासिक दिन है जब वे लगभग आधी सदी के बाद वर्दी उतारने के बाद असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले रहे हैं. उन्होंने इमरजेंसी लगाए जाने के अपने फ़ैसले की भी हिमायत की. लोकतंत्र बुधवार को वर्दी उतारने के लिए हुए समारोह की तुलना में कम भावुक नज़र आ रहे राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पूर्व प्रधानमंत्रियों बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान वापसी का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं की वापसी पाकिस्तान में लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है और इससे राजनीतिक सहमति की शुरुआत हो सकेगी.
दोनों नेताओं के नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "जो लोग चुनाव बहिष्कार की धमकी दे रहे हैं उन्हें समझ लेना चाहिए कि चुनाव किसी भी सूरत में नहीं टाले जाएँगे और आठ जनवरी को नई सरकार के लिए चुनाव हो जाएंगे." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र बहाली का आख़िरी दौर चल रहा है और इसमें कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "पाकिस्तान में 1999 से पहले सही मायनों में लोकतंत्र कभी था ही नहीं" और उन्होंने तीन चरणों में लोकतंत्र स्थापित करने की कोशिश की है. पहला चरण उन्होंने वर्ष 1999 से 2002 को बताया. यह वही समय था जब उन्होंन सेनाध्यक्ष के रूप में नवाज़ शरीफ़ का तख्ता पलटकर सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. उन्होंने कहा कि इस चरण में उन्होंने पाकिस्तान को एक विफल राष्ट्र से एक उन्नतशील अर्थव्यवस्था में बदला. वर्ष 2002 से 2007 को दूसरा चरण बताते हुए उन्होंने कहा कि इस दौर में पाकिस्तान में लोकतंत्र को सार रूप में लागू किया गया. उन्होंने कहा, "सिर्फ़ चुनाव करवाने से ही किसी देश में लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो जाती. इस दौर में हमने महिलाओं से लेकर अल्पसंख्यकों तक सभी को अधिकार संपन्न बनाया और कार्यपालिका को अधिकार देते हुए मीडिया को स्वतंत्रता भी प्रदान की." मौजूदा दौर को तीसरा दौर बताते हुए उन्होंने इसरजेंसी लगाए जाने के फ़ैसले को सही ठहराया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त किए गए मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी का नाम लिए बिना कहा कि पूर्व मुख्यन्यायाधीश लोकतंत्र बहाली की प्रक्रिया को षडयंत्रपूर्वक तरीके से बाधित करना चाहते थे. उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में ख़ासकर, पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में 'आतंकवादी घटनाएँ' बढ़ गई थीं और मीडिया का एक हिस्सा ठीक तरह काम नहीं कर रहा था. परवेज़ मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी शब्द का उपयोग किए बिना कहा, "यह एक अलग सी परिस्थिति थी और इसमें अलग सा क़दम उठाना ज़रुरी था." उन्होंने आरोप लगाया कि वे नियमानुसार 15 नवंबर को ही वर्दी छोड़ देना चाहते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रवैये के कारण वे ऐसा नहीं कर सके. पश्चिमी देशों को सलाह लोकतंत्र बहाली के लिए सलाह देने वाले पश्चिमी देशों के परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक बार फिर अपनी पुरानी सलाह दोहराई है.
उन्होंने पश्चिमी देशों से कहा कि वे लोकतंत्र और मानवाधिकारों को पाकिस्तान में उस तरह लागू नहीं करवा सकते जिसे उन्होंने सदियों के अनुभव के बाद हासिल किया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र अपनी तरह से लागू होगा और फिर उसमें धीरे-धीरे बदलाव आएगा. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में समाज परिवर्तन को धीरे-धीरे स्वीकार करता है इसमें दशकों और सदियों का समय लगता है. उन्होंने लोकतंत्र बहाली की इस प्रक्रिया में लगने वाले समय को बर्दाश्त करने की अपील करते हुए पश्चिमी देशों से सहायता का भी अनुरोध किया. परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश की जनता से वादा किया, "मैं जो भी निर्णय लूँगा उसमें पाकिस्तान का हित सर्वोपरि होगा." शपथ ग्रहण समारोह के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने सलामी गारद का निरीक्षण भी किया. |
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