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करुणा की गिरफ़्तारी पर ब्रिटेन की चुप्पी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि श्रीलंका के पूर्व तमिल विद्रोही नेता कर्नल करुणा अम्मान की गिरफ़्तारी गलत नाम से जारी पासपोर्ट रखने के आरोप में हुई है. कर्नल करुणा एक समय लिबरेशन आँफ तलिम टाइगर ईलम (एलटीटीई) में दूसरे नंबर के नेता थे. वह इस समय ब्रिटेन में अप्रवासन नियमों के तहत बंद हैं. श्रीलंका के एक अख़बार के अनुसार उन्हें अगस्त में राजनयिकों वाला पासपोर्ट जारी किया गया था. मानवाधिकार संगठनों ने ब्रिटेन सरकार से उनपर मानवाधिकारों के दमन का मामला चलाने की अपील की है. विवादित अतीत कर्नल करुणा श्रीलंका में संघर्ष के सबसे विवादास्पद नेताओं में से एक हैं. वह 2004 में एलटीटीई से अलग हो गए थे. अगल होने के बाद उन्होंने कहा था, "वह सरकार के साथ मिलकर देश के पूर्वी भाग पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेंगे." अमरीका के न्यूयॉर्क स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने इस वर्ष के शुरु में कर्नल करुणा के संगठन पर आरोप लगाया था कि उसने श्रीलंका के पूर्वी हिस्से से 200 तमिल बच्चों को जबरन अपने संगठन में भर्ती किया है. श्रीलंका के एक प्रमुख अख़बार 'मार्निंग लीडर' ने अपनी जांच-पड़ताल में पाया कि कर्नल करुणा को कोकिला गुनावर्दने के नाम से एक जाली पासपोर्ट जारी किया गया है. अख़बार के अनुसार उन्हें श्रीलंका के विदेश मंत्रालय की सिफ़ारिश पर ब्रिटिश उच्चायोग ने वीजा जारी किया था. ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने बताया कि कर्नल करुणा इस समय अप्रवासन कानूनों के तहत कैद हैं. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उनका मंत्रायल इस बात की पुष्टि नहीं करना चाहता कि कर्नल करुणा को ज़ाली दस्तावेज़ के आधार पर वीजा दिया गया था. 'मार्निंग लीडर' के अनुसार कर्नल करुणा ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण पाने के लिए भी आवेदन किया है. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "1951 का शरणार्थी घोषणापत्र इस बात की अनुमति देता है कि शरणार्थी के हितों की रक्षा की जाए, जबतक कि उसके ख़िलाफ़ कोई गंभीर अपराध या किसी अन्य तरह का आरोप न हो, जो उसे या उसकी अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के अपात्र बनाता हो." उन्होंने बताया, "घोषणापत्र के अनुसार किसी व्यक्ति को कुछ विशेष परिस्थितियों में उसे उसके देश वापस भी भेजा जा सकता है, भले ही उसे वहां सताए जाने का डर क्यों न हो." उन्होंने कहा, "यह किसी एक मामले पर टिप्पणी नहीं है". | इससे जुड़ी ख़बरें 'प्रभाकरण शांतिवार्ता के लिए प्रतिबद्ध'27 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'विद्रोही शांति के प्रति गंभीर नहीं थे'04 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'हर घर से एक नियुक्ति' का आरोप31 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हवाई हमले में एलटीटीई नेता की मौत02 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस वाइको की गिरफ़्तारी 'तय'01 जनवरी, 1970 | पहला पन्ना एलटीटीई समर्थक सांसद की हत्या10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बच्चों के 'अपहरण' की आलोचना24 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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