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बुधवार, 04 अप्रैल, 2007 को 02:11 GMT तक के समाचार
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'विद्रोही शांति के प्रति गंभीर नहीं थे'
कर्नल करुणा
कर्नल करुणा कड़े सुरक्षा घेरे में रहते हैं
श्रीलंका के तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई से अलग हुए कर्नल करुणा ने कहा है कि एलटीटीई प्रमुख वी प्रभाकरण शांति प्रक्रिया को लेकर कभी गंभीर नहीं थे.

कर्नल करुणा ने विशेष बीबीसी से बातचीत में कहा कि शांति प्रक्रिया को इसलिए लंबा खींचा गया ताकि विद्रोही संघर्ष के लिए तैयार हो सकें.

उल्लेखनीय है कि कर्नल करुणा ने सन् 2004 में तमिल विद्रोहियों का साथ छोड़ दिया था.

ऐसी ख़बरें हैं कि सरकारी सेनाएँ ताज़ा संघर्ष में श्रीलंका के पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण करती जा रही हैं.

अपने गढ़ बट्टीकलोआ से दूर हुई बातचीत में उन्होंने एलटीटीई के सन् 2002 में हुए शांति समझौते पर एलटीटीई के रुख़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

उनका कहना था,'' हमसे (प्रभाकरण) कहा कि इस बातचीत को पाँच वर्षों तक खींचो, किसी तरह वक्त गुज़ारो. इस बीच मैं हथियार खरीद लूंगा और हम लड़ाई के अगले दौर के लिए तैयार होंगे. यह उनकी योजना थी.''

कर्नल करुणा पहले तमिल विद्रोही गुट एलएलटीई के कमांडर थे लेकिन 2004 में उन्होंने और उनके कई साथियों ने इस संगठन का साथ छोड़ दिया. यह विद्रोहियों को बड़ा झटका माना गया था.

कर्नल करुणा बेहद कड़ी घेरे में रह रहे हैं. हालांकि वो इस बात से इनकार करते हैं कि उनके सहयोगी सरकारी सेनाओं के साथ अपने पुराने साथियों से लड़ रहे हैं.

संघर्ष

ग़ौरतलब है कि श्रीलंका में 2005 के अंत से अब तक हुई हिंसा में क़रीब चार हज़ार लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों नागरिक अपना घर छोड़कर दूसरी जगहों पर जा चुके हैं.

 हमसे (प्रभाकरण) कहा कि इस बातचीत को पाँच वर्षों तक खींचो, किसी तरह वक्त गुज़ारो. इस बीच मैं हथियार खरीद लूंगा और हम लड़ाई के अगले दौर के लिए तैयार होंगे
कर्नल करुणा

सेना के तमिल विद्रोहियों के इलाक़ों में घुसने की कोशिश की वजह से हाल के महीनों में पूर्वी श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच भारी संघर्ष हुआ है.

मानवाधिकार संगठनों ने बेघर हुए लोगों के बारे में गहरी चिंता जता चुका है और संयुक्त राष्ट्र ने भी बेघर हुए लोगों के लिए खाद्य सामग्री की कमी होने की चेतावनी भी दे डाली है.

2005 में महिंदा राजपक्षे के सत्ता में आने के बाद से हिंसा में बढ़ोत्तरी हुई है.

एलटीटीई के लड़ाके श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में तमिल राष्ट्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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