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23 तमिल विद्रोही मारने का दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सेना का कहना है कि उसने सोमवार की रात हुए संघर्ष में तमिल विद्रोहियों की चार चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया और 23 विद्रोहियों को मार दिया है. सेना के प्रवक्ता बिग्रेडियर प्रसाद समरसिंघे ने बताया कि ये संघर्ष देश के पूर्वी ज़िले बट्टीकलोआ में हुआ. उन्होंने कहा, "23 तमिल विद्रोही मारे गए हैं. साथ ही हमने चार चौकियाँ भी हथिया ली हैं." एलटीटीई की तरफ़ से इस घटना के बारे में अब तक कोई बयान नहीं दिया गया है. बट्टीकलोआ में इन चौकियों पर कब्ज़ा करने की ख़बर देश के दक्षिणी तटीय शहर अम्पारा में एक यात्री बस में बम विस्फ़ोट होने के बाद आई. इस विस्फ़ोट में 16 लोग मारे गए थे. सेना ने घटना के लिए तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया था. हालांकि एलटीटीई ने आरोप से इनकार किया था. लड़ाई 2005 के अंतिम महीनों से अब तक हुई हिंसा में क़रीब 4000 लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों नागरिक अपना घर छोड़ दूसरी जगहों पर जा चुके हैं. सेना के तमिल विद्रोहियों के इलाक़ों में घुसने की कोशिश की वजह से हाल के महीनों में पूर्वी श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच भारी संघर्ष हुआ है. मानवाधिकार संगठनों ने बेघर हुए लोगों के बारे में गहरी चिंता जता चुका है और संयुक्त राष्ट्र ने भी बेघर हुए लोगों के लिए खाद्य सामग्री की कमी होने की चेतावनी भी दे डाली है. 2005 में महिंदा राजपक्षे के सत्ता में आने के बाद से हिंसा में बढ़ोत्तरी हुई है. एलटीटीई के लड़ाके श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में तमिल राष्ट्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में सीधा हस्तक्षेप नहीं-प्रणव22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका को आर्थिक सहायता पर भ्रम30 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस '14 तमिल विद्रोहियों के शव मिले'11 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका के पूर्वोत्तर भाग में लड़ाई23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बढ़ रही लड़ाई से भारत चिंतित28 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में '15 तमिल विद्रोही मारे गए'29 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस एलटीटीई के हमले पर भारत की चिंता01 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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