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'प्रभाकरण शांतिवार्ता के लिए प्रतिबद्ध' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सरकार का कहना है कि तमिल विद्रोहियों के नेता वी प्रभाकरण ने शांति वार्ता की फिर से शुरु करने के लिए प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है. सेना के प्रवक्ता केहेलिया राम्बुकवेल्ला ने कहा है कि प्रभाकरण ने यह संदेश सरकार के एक अनुरोध के जवाब में भिजवाया है. सरकार की ओर से तमिल विद्रोही नेता से अनुरोध किया गया था कि वे शांतिवार्ता बहाल करने के लिए सकारात्मक प्रतिबद्धता ज़ाहिर करें. प्रभाकरण ने अपना संदेश नार्वे के मध्यस्थों के माध्यम से भिजवाया है. सेना के प्रवक्ता राम्बुकवेल्ला ने कहा है कि इस बीच सुरक्षा की दृष्टि से देश के उत्तर और पूर्वी भागों में सेना की कार्रवाई ज़ारी रहेगी. उल्लेखनीय है कि सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच चार साल पहले शांति समझौता हुआ था. बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि पिछले महीनों में इस शांति समझौते का इस तरह से उल्लंघन हुआ है कि अब यह समझौता सिर्फ़ कागज़ों में रह गया है. इस महीने की शुरुआत में एक बार फिर दोनों पक्ष बिना शर्त शांति वार्ता के लिए सहमत हुए थे और अब वे अक्तूबर के पहले सप्ताह में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में चर्चा करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'श्रीलंका में दोनों पक्ष वार्ता के लिए राज़ी'12 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में लड़ाई तेज़, 28 जवान मारे गए10 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में फिर लड़ाई भड़की10 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका संकट पर ओस्लो बातचीत टूटी08 जून, 2006 | भारत और पड़ोस 'छापामारों पर हत्या का आरोप'30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हमले के बीच हज़ारों लोगों का पलायन26 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले का मतलब युद्ध नहीं'25 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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