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रविवार, 28 अक्तूबर, 2007 को 06:58 GMT तक के समाचार
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लालू ने नीतीश पर निशाना साधा

चेतावनी रैली
बिहार में नीतिश सरकार के विरोध में इस चेतावनी रैली का आयोजन किया गया
बिहार में खोई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने 'चेतावनी रैली' के ज़रिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है.

पटना के गांधी मैदान में आयोजित रैली में उन्होंने जनता दल (युनाइटेड) की अगुआई वाली नीतीश सरकार पर हमले करने के लिए सबसे बड़ा हथियार गुजरात दंगों को बनाया.

उन्होंने दंगों पर प्रसारित स्टिंग ऑपरेशन का ज़िक्र करते हुए नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ संबंधों पर स्पष्टीकरण देने की चुनौती दी.

बिहार में जदयू और भाजपा की मिलजुली सरकार है.

राजद अध्यक्ष ने कहा, "नीतीश जी अपना नज़रिया साफ़ करें कि बदले हालात में आपकी पार्टी का भाजपा के साथ किस तरह का संबंध है. आप तो धर्मनिरपेक्षता का दावा करते हैं. क्या आप बयान देंगे कि मोदी पर हत्या का मामला चलाया जाए."

लालू प्रसाद यादव ने गुजरात दंगों को देश के लिए शर्मनाक घटना बताते हुए वहाँ के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की माँग की.

जनाधार बढ़ाने की कोशिश

लालू प्रसाद यादव के संबोधन से स्पष्ट था कि वो राजद का सामाजिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

इसके लिए उन्होंने मायावती के दलित-ब्रह्मण गठजोड़ का हिट फ़ॉर्मूला बिहार में भी दोहराने के संकेत दे दिए.

 नीतीश जी अपना नज़रिया साफ़ करें कि बदले हालात में आपकी पार्टी का भाजपा के साथ किस तरह का संबंध है. आप तो धर्मनिरपेक्षता का दावा करते हैं. क्या आप बयान देंगे कि मोदी पर हत्या का मामला चलाया जाए.
लालू प्रसाद यादव

राजद अध्यक्ष ने कहा, "अगर बिहार में हमारी हुकूमत आती है तो हम संविधान संशोधन का प्रस्ताव भेजेंगे ताकि अगड़ी जातियों के ग़रीबों को भी दस फ़ीसदी आरक्षण का फ़ायदा मिल सके."

उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों को जो सपने दिखाए थे वो दो साल में चकनाचूर हो गए.

लालू प्रसाद यादव ने कहा कि नीतीश सरकार की विफलता को उजागर करने के लिए यह रैली आयोजित की गई है.

उनका कहना था, "अगर इस चेतावनी रैली से भी सरकार नहीं सुधरेगी तो जल्दी ही राजद सरकार भगावन रैली आयोजित करेगी."

इस रैली में हालाँकि काफी संख्या में लोग जुटे लेकिन प्रेक्षकों का कहना है कि संख्या राजद सरकार के समय हुई 'ग़रीब रैला' से कम रही.

उधर नीतीश कुमार का कहना है कि लालू जी लाख रैलियां बुला लें लेकिन इस राज्य के लोग उनके पिछले 15 सालों के कुशासन को फिर जड़ जमाने नहीं देंगें.

जो भी हो इस रैली को भारी सज-धज के साथ विशाल बनाने का जो कौशल लालू ने दिखाया है उससे बिहार में उनकी राजनीतिक पकड़ के संकेत मिलते हैं.

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