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ऑटो-रिक्शा रैली, पर ज़रा हटकर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण भारतीय शहर चेन्नई से मुंबई के बीच ऑटो-रिक्शा रैली शुरू हुई है. ख़ास बात ये है कि रैली में हिस्सा ले रहे 72 प्रतियोगियों में भारत का प्रतिनिधित्व ग़ायब है. रैली का आयोजन हर साल करने की योजना है. इसका लक्ष्य चेन्नई से मुंबई तक के 1900 किलोमीटर लंबे सफ़र के दौरान भारत की समृद्ध विरासत और बहुसंस्कृतिक समाज की तरफ़ दुनिया का ध्यान दिलाना है. आयोजकों का कहना है कि रैली रोमांच से भरपूर होगी और चालकों के दमखम, ताक़त और धैर्य की परीक्षा होगी. आयोजकों का कहना है कि रैली के 17 अगस्त से पहले मुंबई पहुँचने की संभावना नहीं है. रैली में हिस्सा ले रहे दुनियाभर के प्रतियोगी ऑटोरिक्शा के ज़रिए भारत की सभ्यता और संस्कृति की झलक पाने को आतुर हैं. रैली सड़कों, कच्चे रास्तों और पहाड़ियों के बीच में से गुजरते हुए मुंबई पहुँचेगी. आयोजक अरविंद कुमार का कहना है कि पिछले साल चेन्नई से कन्याकुमारी के बीच रैली के सफल आयोजन के बाद उन्होंने चेन्नई-मुंबई रैली आयोजित करने का फ़ैसला किया है. हर प्रतिस्पर्धी को रैली के दौरान अंक मिलेंगे और सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले को विजेता घोषित किया जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें जनसेवा मानों जुनून है विनायक के लिए23 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सूअरों का ओलंपिक17 अप्रैल, 2006 | खेल की दुनिया रिटायर होने की कोई योजना नहीं:गांगुली02 फ़रवरी, 2006 | खेल की दुनिया जब गाँधी जी ने पूछा, ये हॉकी क्या है?10 अगस्त, 2004 | खेल की दुनिया अटलांटा ओलंपिक में चमके थे पेस21 जुलाई, 2004 | खेल की दुनिया आर्मस्ट्रांग ने इतिहास रचा25 जुलाई, 2004 | खेल की दुनिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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