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सूअरों का ओलंपिक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रुस के मास्को शहर में आयोजित हुए " सूअर ओलंपिक" में भले ही बहुत सारे सूअरों ने हिस्सा नहीं लिया हो लेकिन जितने सूअर आए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा ज़रुर मनवाया. सात देशों से 12 सूअर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने आए और प्रतियोगिताएं थीं सूअर दौड़, तैराकी, फुटबॉल आदि. मास्को के पास प्रदर्शनी स्थल में प्रतियोगिताओं के आयोजन के दौरान कई लोगों ने सूअरों पर पैसा भी लगाया. हर प्रतियोगिताओं के लिए सूअरों को एक विशेष किस्म की ड्रेस दी गई थी और पूरे सम्मान के साथ वो प्रतियोगिताम भाग ले रहे थे. हिस्सा लेने वालों में थे यूक्रेन से माइकोला, दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन और रुस के सुअर कोस्टिक रुसिच स्केविन. पहली प्रतियोगिता थी दौड़ की जिसमें सूअरों को दौड़ाने के लिए उनके पीछे मालिकों को भी दौड़ना पड़ा. फुटबॉल प्रतियोगिता में पांच पांच सूअरों की दो टीमें थीं और जिसमें वो अपनी थूथनी से फुटबॉल खेले. सबसे मज़ेदार खेल रहा तैराकी का जिसमें सूअरों को तैरना था लेकिन मज़ा तब आया जब सूअर तैरने की बजाय पानी में एक दूसरे से खेलने लगे. सूअर खेल संघ के उपाध्यक्ष एलेक्सी शार्सकोव कहते हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे सूअरों की एक ऐसी नस्ल तैयार करने की कोशिशि की जाएगी जिनकी थूथनी लंबी हो जिससे वो खेल सकें और ऐसे सूअरों के खाने पर प्रतिबंध लगवाने की कोशिश होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें सूअर का वीर्य अंतरिक्ष में भेजेगा चीन17 जुलाई, 2005 | विज्ञान चमकीला हरा सूअर बन पाएगा12 जनवरी, 2006 | विज्ञान सूअर चुराया करते थे मंडेला17 मार्च, 2006 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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