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सुनामी चेतावनी केंद्र पूरी तरह तैयार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुनामी आने के पहले से लोगों को चेतावनी जारी की जा सके, इस उद्देश्य से भारत ने एक सुनामी 'अर्ली वॉर्निंग सिस्टम' बनाया है. हैदराबाद में बनाया गया यह विशेष केंद्र समुद्र में तीन किलोमीटर की गहराई पर लगे उपकरणों से मिलने वाली जानकारी अंतरिक्ष में घूम रहे उपग्रहों को भेजकर मिनटों में जानकारी देगा. जब सुनामी आती है तो उसकी गति होती है लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटा. इस गति से अगर अंडमान निकोबार और इंडोनेशिया के बीच भूकंप आए तो उसे चेन्नई जैसे भारतीय तटों तक पहुँचने में दो घंटे का समय लगता है. सवा सौ करोड़ रुपए की लागत से बने हैदराबाद स्थित भारत के सुनामी अर्ली वॉर्निंग सेंटर के निदेशक हैं शैलेश नायक. वे कहते हैं कि उनके केंद्र में भूकंप की जानकारी जमा करने में 15 मिनट और नतीजा बताने में 30 मिनट का समय लगेगा. दिलचस्प बात ये है कि भारत के सुनामी सेंटर की पहली परीक्षा उसके उदघाटन से पहले हुई. अमरीकी विज्ञान पत्रिका साइंस के भारत संवाददाता पल्लव बागला कहते हैं कि 12 सितंबर को इंडोनेशिया में आए भूकंप की जानकारी भारतीय सेंटर ने पेसिफ़िक सेंटर से भी ज़्यादा सटीक दी थी. भारत के सुनामी सेंटर के लिए पानी से तीन किलोमीटर नीचे सेंसर लगाए गए हैं जिससे मिलने वाली जानकारी अंतरिक्ष में घूम रहे उपग्रह को भेजी जाती है और वहाँ से हैदराबाद स्थित केंद्र में आती है और ये सब होता है लगभग 2 से 3 मिनट में. स्वदेशी जिस तरह भारत ने सुनामी के बाद किसी भी देश से सहायता लेने से इनकार कर दिया था उसी तरह सुनामी वॉर्निंग सेंटर भी पूरी तरह से भारत में बना है, सिवाय उस एक उपकरण के जो समुद्र के अंदर लगाया गया है.
पत्रकार पल्लव बागला कहते हैं कि भारत को सुनामी का ख़तरा दो इलाक़ों से है, एक इंडोनेशिया की ओर और दूसरा पाकिस्तान के दक्षिण से और इन दोनों इलाक़ों में भारत के सुनामी सेंटर को विशेष ध्यान देना होगा. भारत का सुनामी अर्ली वॉर्निंग सेंटर विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत बने इंडियन नेशनल ओशन इंफ़र्मेशन सेंटर का हिस्सा है. सुनामी सेंटर के निदेशक शैलेश नायक कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया के केंद्रों के मुक़ाबले भारत का केंद्र अभी एक युवा वैज्ञानिक की तरह है जिसे बहुत कुछ सीखना है. लेकिन हैदराबाद के इस केंद्र का समझ लेना कि सुनामी आने वाली है और इस जानकारी के आधार पर लोगों को बचा लेना, ये दो अलग अलग बातें हैं. सुनामी की चेतावनी जारी होने के बाद भी लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना एक बहुत बड़ी चुनौती है जिसका उत्तर भारत सरकार को ढूँढना होगा. अगर मालूम भी हो कि एक घंटे में किसी जगह पर सुनामी आ सकती है तो सरकार कैसे लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएगी. ये काम युद्ध स्तर पर करना होगा और इसे नियोजित तरीके से लागू कराना होगा, इसके अभ्यास करने होंगे. जानकार कहते हैं कि ये है अगला क़दम जिस पर भारत सरकार को अब काम करना है. | इससे जुड़ी ख़बरें सूनामी से हुए अनाथों की हालत08 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी से नुक़सान के नए आँकड़े 07 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस कितनी कारगर है चेतावनी प्रणाली?06 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना मुसीबतें पहले ही क्या कम थीं कि...04 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना 'बच्चों को संभालना सर्वोच्च प्राथमिकता'05 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना तकनीकी उपकरणों की कमी: सिब्बल03 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस 'पीड़ित देशों को पूरी सहायता दी जाएगी'03 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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