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मंगलवार, 04 सितंबर, 2007 को 12:36 GMT तक के समाचार
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नौसैनिक अभ्यास के ख़िलाफ़ 'जत्था'

ज्योति बसु
ज्योति बसु ने सरकार को परमाणु समझौते को लेकर भी चेतावनी दी है
अमरीका के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास के ख़िलाफ़ वामपंथी दलों के मंगलवार से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया है.

वामपंथी दलों ने इस विरोध प्रदर्शन को 'जत्था' नाम दिया है और यह एक हफ़्ते तक चलेगा.

साथ ही वामपंथी नेताओं ने यूपीए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार परमाणु समझौते को लेकर आगे बढ़ती है तो इसके नतीजे भुगतने होंगे.

इस बीच बंगाल की खाड़ी में भारत-अमरीका सहित पाँच देशों की नौसेना का संयुक्त अभ्यास शुरु हो चुका है.

इस अभ्यास में अमरीका के दो विमानवाही पोत और 11 अन्य जलपोत हिस्सा ले रहे हैं.

विरोध प्रदर्शन

जत्था की शुरुआत करते हुए कोलकाता में वरिष्ठ वामपंथी नेता और सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य ज्योति बसु ने केंद्र की यूपीए सरकार पर 'अमरीका की ओर झुकाव' का आरोप लगाया.

 यूपीए सरकार देश को अमरीकी पाले में ले जाने की कोशिश कर रही है, जो उस न्यूनतम साझा कार्यक्रम के ख़िलाफ़ है जिसके आधार पर वामपंथी दल यूपीए सरकार को समर्थन दे रहे हैं
ज्योति बसु

समचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार देश को अमरीकी पाले में ले जाने की कोशिश कर रही है, जो उस न्यूनतम साझा कार्यक्रम के ख़िलाफ़ है जिसके आधार पर वामपंथी दल यूपीए सरकार को समर्थन दे रहे हैं."

सीपीएम के महासचिव ने साफ़ कहा कि जब तक केंद्र के साथ गठित समिति की रिपोर्ट नहीं आ जाती, सरकार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ समझौते की दिशा में कोई बातचीत नहीं करनी चाहिए.

सीपीआई महासचिव एबी बर्धन जो कोलकाता से लेकर विशाखापट्टनम तक जत्थे का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा, "मैं नहीं जानता कि समिति की रिपोर्ट में क्या होगा लेकिन यदि सरकार ने समिति की चिंताओं को दरकिनार करके समझौते की ओर क़दम बढ़ाया तो उसे नतीजों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा."

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास पर वामपंथियों के विरोध पर सरकार की ओर टिप्पणी करते हुए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि इस मुद्दे पर यह वामपंथी दलों की चिंता हो सकती है वैसे तो संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 1992 से चल रहा है.

जत्था

लगभग एक हफ़्ते तक चलने वाले इस नौसैनिक अभ्यास के विरोध में सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन कोलकाता से अपनी यात्रा की शुरु करके उड़ीसा होते हुए आठ सितंबर को विशाखापत्तनम पहुंचेंगे.

वामपंथी दलों का जत्था
कई शहरों में वामपंथी नेता विरोध का नेतृत्व कर रहे हैं

रास्ते में जगह-जगह पर रैलियाँ होंगी और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. कोलकाता में इस रैली को ज्योति बसु झंडा दिखा कर रवाना करेंगे.

इसी तरह चेन्नई में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम के नेता प्रकाश कारत विरोध की कमान संभालेंगे.

इस तरह के नौसैनिक अभ्यास पहले भी होते रहे हैं तो इस बार विरोध क्यों. इस पर सीपीआई के नेता अतुल कुमार अंजान का कहना है, “कौन सा अमरीका का हित है जो वह 20 हज़ार किलोमीटर दूर से आकर सैनिक अभ्यास कर रहा है. भारत को किससे ख़तरा है. यहाँ नए लोगों को चौधरी बनाया जा रहा है. ये सब आने वाले समय में विदेश नीति को पलीता लगा कर हमारे मुहाने पर अमरीकी सेना को खड़ा करने की कोशिश है.”

वाम दलों का कहना है कि उनकी अमरीका से कोई शत्रुता नहीं है और उनका विरोध अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों से है.

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