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अमरीकी युद्धपोत भारतीय नौसेना में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और अमरीका के बीच गहराते संबंधों को दर्शाते हुए दोनों देशों के इतिहास में पहली बार किसी अमरीकी युद्धपोत को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है. यूएसएस ट्रेंटन नामक अमरीकी युद्धपोत को भारत ने 'जलअश्व' का नाम देकर नौसैनिक बेड़े में शामिल कर लिया है. अमरीका में भारतीय राजदूत रोनेन सेन ने वर्जीनिया के नोर्फ़ोक नौसैनिक बंदरगाह पर एक भव्य समारोह में इस युद्वपोत को भारतीय नौसेना में औपचारिक तौर पर शामिल कर लिया. इस युद्वपोत पर लगे अमरीकी राष्ट्रीय ध्वज को उतारकर भारतीय तिरंगा पहरा दिया गया. जलअश्व नामक युद्वपोत अब भारतीय नौसेना का सबसे आधुनिक युद्वपोत कहा जा रहा है. इस विशालकाय युद्वपोत को 'लैंडिंग प्लेटफ़ार्म डॉक' भी कहा जाता है क्योंकि इस पर इतनी ज़्यादा जगह होती है कि सैकड़ों नौसेनिकों के साथ कई टैंक और अन्य भारी सामान इसमें लाद कर दूर तक का सफ़र तय किया जा सकता है. भारत का दावा है कि इस युद्वपोत के भारतीय नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की क्षमता काफ़ी बढ़ जाएगी. भारतीय राजदूत रोनेन सेन ने कहा, “हमारे देशों के बीच यह एक नई शुरूआत है. इस अमरीकी युद्वपोत को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाना दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के साथ साथ भरोसे और दूरगामी कटिबद्वता को भी दर्शाता है और अब इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच भी संबंध और गहरे होंगे.” इस युद्वपोत के ज़रिए हथियारों से लैस 968 नौसैनिकों के अलावा 130 विभिन्न प्रकार की सैन्य गाड़ियों को भी समुद्री रास्ते से एक जगह से दूसरी जगह तेज़ रफ़तार से ले जाया जा सकता है. इसके अलावा इसमें कई हेलीकॉप्टरों, लड़ाकू विमानों और टैंकों को भी रखा जा सकता है. हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए खास तरह की हवाई पट्टियां भी इस युद्वपोत की खासियत है. इसके अलावा एक छोटा सा सैन्य हस्पताल भी इस युद्वपोत का हिस्सा है. जलअश्व युद्वपोत 173 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है और इसका वज़न लगभग 17 हज़ार टन है. इसकी तह से इसके उपरी सिरे तक की उंचाई कोई 11 मंज़िला इमारत की उंचाई के बराबर है. नई ताक़त भारतीय नौसेना के कैप्टन बी एस अहलूवालिया इस युद्वपोत के कमांडर हैं. उनके अलावा 27 नौसैनिक अधिकारी और 302 नौसैनिक इस युद्वपोत के दल में शामिल हैं.
इस तरह का युद्वपोत भारतीय नौसेना में पहली बार शामिल किया गया है और विश्व भर में सिर्फ़ चंद देशों के पास ही इस तरह का युद्वपोत है. भारत की ओर से अमरीका से इस युद्वपोत को खरीदने की मंज़ूरी पिछले साल ही मिल गई थी. उसके बाद भारतीय नौसेना का एक दल इसकी जांच पड़ताल करने अमरीका पहुँचा था और अमरीकी नौसैनिकों के साथ उन्होंने इस युद्वपोत के बारे में ट्रेनिंग भी ली थी. इस साल जनवरी में इस युद्वपोत को भारतीय नौसेना में शामिल करने की कागज़ी कार्रवाई पूरी कर ली गई थी और फिर उसकी मरम्मत वगैरह का काम अमरीकी बंदरगाह पर ही किया गया था. यह वही युद्वपोत है जिसे अमरीका ने हाल के इसराइली-लेबनान युद्व के दौरान युद्व क्षेत्र से अमरीकीयों को निकालने के लिए भी इस्तेमाल किया था. भारतीय नौसेना को विश्व में पांचवीं सबसे बड़ी नौसेना माना जाता है और उसमें करीब 55 हज़ार नौसैनिक हैं. भारतीय नौसेना में 155 से ज़्यादा विभिन्न प्रकार के पोत हैं जिनमें आईएनएस विराट सबसे बड़ा युद्वपोत है और अमरीका में बना जलअश्व युद्वपोत दूसरे नंबर पर है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत-अमरीकी युद्धाभ्यास | भारत और पड़ोस पाक-अमरीका युद्धाभ्यास18 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना भारत-अमरीकी रक्षा गुट की बैठक 20 मई, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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