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शुक्रवार, 31 अगस्त, 2007 को 07:59 GMT तक के समाचार
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गायों के लिए भी पहचानपत्र..

भारतीय अर्धसैनिक बल
सीमा सुरक्षा बल ने गायों की बढ़ती तस्करी रोकने के लिए अभियान चलाया है
बंगलादेश की सीमा से सटे भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान गायों की फोटो खींचने में लगे हैं ताकि उनके पहचान पत्र बन सकें.

बीएसएफ़ के प्रवक्ता जीके शर्मा का कहना है कि गायों की तस्करी रोकने के लिए उनका पहचान पत्र जारी करने का अभियान चलाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से रोज़ाना सैकड़ो गायों को तस्करी कर बांग्लादेश भेजा जाता है जबकि भारत से पशुओं के निर्यात पर पाबंदी है.

इसके अलावा बहुसंख्य हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ भी गायों से जुड़ी हुई हैं.

सीमावर्ती मुर्शिदाबाद ज़िले में गाँववालों को इन दिनों अपने पशुओं का पहचानपत्र बनवाने के लिए फोटो स्टूडियो के बाहर कतारों में लगे देखा जा सकता है.

बीएसएफ़ का कहना है कि गायों की सबसे अधिक तस्करी इसी ज़िले से होती है इसलिए यहाँ इस अभियान की शुरुआत की गई है और अगर यह सफल रहा तो इसे और ज़िलों में भी लागू किया जाएगा.

तस्करी का नेटवर्क

एक अनुमान के मुताबिक़ भारत से हर रोज़ लगभग 20-30 हजार गायों को तस्करी के ज़रिए बांग्लादेश भेजा जाता है और यह तस्करी ज़्यादातर पश्चिम बंगाल के रास्ते होती है.

सीमा पर स्थित इन गाँवों में तस्करों ने एक मज़बूत नेटवर्क बना रखा है जहाँ इन्हें सीमा पार भेजने से पहले बाड़ों में रखा जाता है.
सुरिंदर सिंह, बीएसएफ अधिकारी, मुर्शिदाबाद

गायों को मुख्य तौर पर मांस के लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान भेजा जाता है. मुस्लिम त्यौहारों के यह मांग तो और बढ़ जाती है. तस्कर उत्तरी भारत के हरियाणा तथा पंजाब जैसे राज्यों से गायों को पश्चिम बंगाल लाते हैं.

मुर्शिदाबाद में बीएसएफ के प्रवक्ता सुरिंदर सिंह ने कहा कि सीमा पर स्थित इन गाँवों में तस्करों ने एक मज़बूत नेटवर्क बना रखा है जहाँ इन्हें सीमा पार भेजने से पहले बाड़ों में रखा जाता है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि इन पहचान पत्रों से तस्करी रोकने में मदद मिलेगी. लेकिन स्थानीय गाँववासियों का कहना है कि जानवरों की फोटोग्राफी से उनका काम प्रभावित होगा.

गाय

दरअसल पुलिस और बीएसएफ़ के जवान तस्करी के जानवरों की तलाशी में अक्सर गांव में छापामारी करते हैं. लेकिन इस पहचानपत्र के बाद गाँववासियों को इससे राहत मिल सकती है.

अधिकारियों का मानना है कि जानवरों पर बनाए गए अन्य पहचान चिन्हों से तस्कर आसानी से छेड़छाड़ कर लेते हैं लेकिन फोटो पहचानपत्र के साथ ऐसी संभावना नहीं होगी.

दो साल की वैधता वाले इस लैमिनेटेड कार्ड में जानवर और उसके मालिक की तस्वीर होगी. जिसमें जानवर के रंगरूप. कद, लिंग तथा सींगों की लंबाई जैसी जानकारियां दर्ज़ होंगीं.

इसके अलावा मालिक का पता तथा जानवर की विशेष पहचान जैसी जानकारियां भी होंगीं.

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