BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 20 अगस्त, 2007 को 10:28 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अधिकारियों को उल्लू बना रहे हैं तस्कर

उल्लू
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत उल्लू का कारोबार और शिकार अवैध है
उत्तराखंड से दुर्लभ प्रजाति के उल्लुओं की तस्करी के मामले सामने आए हैं. तस्करी के तार दिल्ली से लेकर विदेशों तक जुड़े हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इस उल्लू की कई दुर्लभ प्रजातियों की ज़बरदस्त माँग और क़ीमत है.

यही वजह है कि उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में उल्लू तस्करों का निशाना बन रहे हैं और इन्हें तस्करी कर दिल्ली, मुंबई से लेकर जापान, अरब और यूरोपीय देशों में भेजा जा रहा है.

अपराध

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत दुर्लभ पक्षियों की सूची में भारतीय उल्लू भी शामिल है.

इस क़ानून के तहत उल्लू का शिकार और कारोबार अवैध है.

शिवालिक वन प्रखंड के अधिकारियों ने देहरादून के पास सहसपुर इलाके में एक उद्योगपति के घर पर छापा मारकर फॉरेस्ट डॉट नामक लुप्तप्राय जाति के उल्लू बरामद किए हैं.

 पकड़े गए व्यक्ति ने बताया है कि अब तक वह लगभग सौ उल्लू बेच चुका है. अवैध व्यापार का ये बहुत गंभीर मामला है और हम इस तस्करी को रोकना चाहते हैं
वीके गांगते, डीएफओ, देहरादून

जाँच में पता चला है कि ये एक बड़ा गिरोह है जो आसपास के ग्रामीणों को उल्लू पकड़ने के लिए प्रेरित करता है.

ग्रामीणों से सस्ते मूल्य पर उल्लू खरीद कर ये गिरोह इन्हें दिल्ली, मुंबई और गुजरात भेजता है.

वहाँ से इन्हें यूरोप और कुछ अरब देशों को भी भेजा जाता है.

देहरादून के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) वीके गांगते कहते हैं, “ पकड़े गए व्यक्ति ने बताया है कि अब तक वह लगभग सौ उल्लू बेच चुका है. अवैध व्यापार का ये बहुत गंभीर मामला है और हम इस तस्करी को रोकना चाहते हैं.”

मान्यता

पूरी दुनिया में उल्लू की लगभग 225 प्रजातियां हैं. हालाँकि कई संस्कृतियों के लोकाचार में उल्लू को अशुभ माना जाता है, लेकिन साथ ही संपन्नता और बुद्धि का प्रतीक भी.

यूनानी मान्यताओं में उल्लू का संबंध कला और कौशल की देवी एथेना से माना गया है और जापान में भी इसे देवताओं का संदेशवाहक समझा जाता है.

हिंदू मान्यताओं के अनुसार धन की देवी लक्ष्मी उल्लू पर विराजती हैं और भारत में यही मान्यता इस पक्षी की जान की दुश्मन बन गई है.

यही वजह है कि दीपावली के ठीक पहले के कुछ महीनों में उल्लू की तस्करी काफ़ी बढ़ जाती है.

हर साल भारत के विभिन्न हिस्सों में दीपावली की पूर्व संध्या पर उल्लू की बलि चढ़ाने के सैकड़ों मामले सामने आते हैं.

वन्य जीव विशेषज्ञ आनन्द सिह नेगी कहते हैं,”उल्लू जैव विविधता का प्रतीक है. मुख्य रूप से ये छोटे कीट-पतंगों और स्तनपाई जीवों का शिकार करता है और खाद्य श्रृंखला और पर्यावरण संतुलन में इसका अहम योगदान है. अफसोस की बात है कि अंधविश्वास की वजह से इन्हें मारा जा रहा है."

इससे जुड़ी ख़बरें
भागो...भागो...अजगर आया
12 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
जादू मंतर के चक्कर में चक्करघिन्नी
30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
किसका है आसमान?
| भारत और पड़ोस
230 साल की उम्र में ऑपरेशन
30 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
राजस्थान में अफ़ीम की खेती पर विवाद
23 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस
वादी में लहलहाती नशे की फ़सल
17 मई, 2007 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>