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भागो...भागो...अजगर आया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अजगर की तरह पसर जाना ये कहावत सबने सुनी होगी लेकिन अगर सच में 16 फुट लंबा और भारी-भरकम अजगर खाने-पीने के बाद शहर की सैर को चल पड़े तो. उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िले में कुछ ऐसा ही हुआ. राज्य के राजाजी नेशनल पार्क के जंगलों से निकल कर एक अजगर तीर्थनगरी हरिद्वार के एक होटल के पास पहुँच गया. उसी समय एक कांवड़िये की नज़र उस अजगर पर पड़ी. हरिद्वार में इस समय लाखों की तादाद में कांवड़िये यानी शिवभक्त अभिषेक के लिये गंगाजल लेने आते हैं. पहले तो मेले के शोर और गाड़ियों की आवाजाही से घबराकर अजगर एक झाड़ी के पीछे छुप गया लेकिन देखते-देखते अजगर की ख़बर जंगल की आग की तरह फैली और वहाँ कांवड़ियों का तांता लग गया. सांप को शिव का प्रतीक माना जाता है और कुछ शिवभक्त साक्षात अजगर के दर्शन को अपना सौभाग्य मानने लगे. कांवड़ लेकर वापस अपने शहर ग़ाज़ियाबाद जा रहे रवि चौहान ने कहा, शिकार लेकिन कुछ कांवड़िये इसे कौतुक और शरारत से छेड़ने भी लगे. किसी ने इसकी पूंछ पकड़ी, किसी ने लकड़ी से कुरेदना चाहा तो कोई पत्थर मारकर उसकी हरकत का मजा लेने लगा.
उस समय अजगर ने कोई बड़ा जानवर निगल रखा था इसलिए मुश्किल से ही रेंग पा रहा था. वन्य जीव विशेषज्ञ और उत्तराखंड के पूर्व मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक आनन्द सिंह नेगी बताते हैं, "शिकार को निगलने के बाद उसे पचाने के लिये अजगर या तो कई दिनों तक आराम करता है या फिर किसी पेड़ पर गोल-गोल लिपट जाता है जिससे कि उस जानवर की हड्डियाँ चूर-चूर हो जाती हैं और अजगर का आहार पच जाता है. शायद इस अजगर की भी यही दशा रही होगी तभी इसने किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया.” बहरहाल राजाजी नेशनल पार्क के अधिकारियों को ज़ल्दी ही इसकी ख़बर लग गई और उन्होंने कुशल वनरक्षकों को इसे पकड़ने के लिये भेजा. उन्होंने ज़ल्दी ही पुलिस बल की सहायता से लोगों को वहाँ से हटाया और पूरी जगह को घेर लिया. फिर उन्होंने अजगर को बेहोश करने की कोशिश की लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली और अजगर भी फुफकारने लगा. राजाजी नेशनल पार्क के चीला रेंज के रेंजर महेंद्र सिंह नेगी ने बताया, "ये काफ़ी बड़ा अजगर था और इसके सिर पर एक विशेष प्रकार का औजार रखकर उसे काबू में किया जा सका.” करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आधा दर्जन से अधिक लोग अजगर को पकड़कर वापस जंगल में छोड़ने में सफल हुए. राजाजी नेशनल पार्क एशियाई हाथियों का सबसे बड़ा वास-स्थल है. अब तक यहाँ से कई बार हाथियों के झुंड और कभी-कभार तेंदुए आबादी की ओर ज़रूर रुख़ करते थे लेकिन यह शायद पहला मौका था जब अजगर शहर में घुस आया था. | इससे जुड़ी ख़बरें साँपों से परेशान लोगों के लिए हेल्पलाइन17 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सँपेरों ने साँप छोड़ने की धमकी दी 25 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस सँपेरों को विधानसभा में घुसने से रोका10 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस यह नागलोक है, सचमुच का नागलोक06 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस ज़हर साँप और अंधविश्वास का12 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस चढ़ता पानी, बहते साँप और बढ़ती कमाई15 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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