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सँपेरों को विधानसभा में घुसने से रोका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में उड़ीसा की पुलिस ने राज्य विधानसभा में साँप छोड़ने की सँपेरों की कोशिश को नाकाम कर दिया है. सँपेरे सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं जिनसे उनके धंधे पर बुरा असर पड़ता है. हाल के दिनों में वन विभाग के अधिकारियों ने सैंकड़ो की संख्या में उनके साँप छीन कर जंगलों में छोड़ दिए हैं. अधिकारियों का आरोप है कि सँपेरे अपने साँपों को सताते हैं. सँपेरों की माँग है कि वैकल्पिक रोज़गार मिलने तक उनके धंधे पर चोट नहीं की जाए. जुलूस शुक्रवार को सैंकड़ो सँपेरे जुलूस बनाकर भुवनेश्वर में विधानसभा तक आए.
पुलिस ने उन्हें विधानसभा भवन से कुछ दूर पहले ही रोक लिया. बाद में सँपेरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाक़ात की. उन्होंने मुख्यमंत्री को अपनी माँगों की सूची सौंपी. विरोध प्रदर्शन में शामिल सँपेरों में से ज़्यादातर भुवनेश्वर से सटे गाँव पद्मकेशरपुर के थे. सँपेरों को समर्थन देने वाले संगठन पीपुल्स राइट्स फ़ोरम के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उड़ीसा के 10 हज़ार सँपेरों को अन्य राज्यों के सँपेरों का भी समर्थन प्राप्त है. |
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