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सँपेरों ने साँप छोड़ने की धमकी दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा के सँपेरों ने धमकी दी है कि अगर उनकी माँगे नहीं मानी गईं तो वे विधानसभा में साँप छोड़ देंगे. उड़ीसा में वन्य जीव क़ानून के तहत कई सँपेरों को गिरफ़्तार किया गया है और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है, सँपेरे राज्य सरकार की इसी नीति का विरोध कर रहे हैं. सँपेरों के संगठन का कहना है कि उनके धंधे से लगभग 20 हज़ार लोगों की रोज़ी रोटी जुड़ी है और सरकार को इस तरह का अभियान बंद कर देना चाहिए. चित्तरंजन दास नाम के एक सँपेरे ने कहा, "यह हमारा पुश्तैनी धंधा है, हमें इसके अलावा कुछ नहीं आता, हम सदियों से यही करते रहे हैं, अगर हमें रोका गया तो हम क्या करेंगे?" बहस दूसरी ओर, उड़ीसा में वन्य जीवों की सुरक्षा के पैरोकार लंबे समय से सँपेरों के धंधे पर पाबंदी लगाने की माँग करते रहे हैं, उनका कहना है कि ये लोग साँपों के साथ ज़्यादती और क्रूरता करते हैं. उन्होंने इस आरोप का खंडन किया कि साँपों के साथ ज़्यादती की जाती है, चित्तरंजन का कहना था, "यह हमारी रोज़ी रोटी है, हम उन्हें नुक़सान कैसे पहुँचा सकते हैं." सँपेरों ने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों ने उनके साँप छीन लिए और उन्हें गिरफ़्तार किया, साँपों को चिड़ियाघर भेज दिया गया. सनातन बेहरा नाम के एक सँपेरे ने ग़ुस्से में भरकर कहा, "अगर साँप का खेल दिखाकर रोज़ी कमाना पाप है तो चिड़ियाघर के अधिकारी क्या कर रहे हैं, वे भी तो जानवर दिखाने के पैसे लेते हैं?" नंदनकानन चिड़ियाघर के प्रवक्ता ने कहा कि साँपों का इलाज किया जा रहा है जिसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा. राज्य के वरिष्ठ वन अधिकारी लाख सिंह कहते हैं कि "ज़माना बदल गया है, साँपों को छोड़कर सँपेरों को कोई और धंधा तलाशना चाहिए." |
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