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साँपों से परेशान लोगों के लिए हेल्पलाइन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बंगलौर के मोहम्मद अनीस एक अदभुत हेल्पलाइन चला रहे हैं. वे ऐसे लोगों की सहायता करते हैं जिन्हें साँपों से जुड़ी कोई परेशानी है. उनकी हर सहायता मुफ़्त होती है. धीरे-धीरे लोग उनके बारे में इतना जान गए हैं कि बारिश के दिनों में उन्हें हर दिन 25-30 कॉल मिलते हैं. अनीस बताते हैं कि उन्हें बचपन से साँपों से बड़ा लगाव है और वे मानते हैं कि साँप के महत्त्वपूर्ण योगदान को समाज नहीं समझ पाया है. अनीस कहते हैं 80 फ़ीसदी साँप ख़तरनाक नहीं हैं केवल 20 प्रतिशत साँप ही ज़हरीले होते हैं. वे कहते हैं कि साँपों का एक बड़ा योगदान तो यह है कि इन साँपों के कारण चूहों की बढ़ती संख्या को नियंत्रण में रखा जा सकता है. हेल्पलाइन आज अनीस अपने घर से ही 24 घंटे की एक हेल्पलाइन चला रहे हैं. अगर किसी के मकान में या दफ़्तर में साँप घुस जाता है तो वे अनीस की तुरंत सहायता ले सकते हैं. अनीस ने 8-10 लड़कों को साँप पकड़ने का प्रशिक्षण दिया है. अनीस यह काम बिना किसी पैसे के करते हैं. उनका एक लक्ष्य है, साँपों को बचाना और लोगों में जागरूकता फैलाना. अनीस बताते हैं कि यह सब बचपन से शुरु हुआ जब एक बार स्कूल के रास्ते में उन्होंने सड़क पर एक घायल साँप पाया. उन्होंने उसे स्कूल के बस्ते में रखा और स्कूल चले गए. लेकिन स्कूल में उनके बस्ते से निकल गया और जिस कारण उन्हें स्कूल के अध्यापक से ख़ूब मार खानी पड़ी. अनीस कहते हैं, "मुझे यह नहीं पता कि उस छोटे बच्चे ने उस घटना से क्या समझा. मुझे इतना याद है कि तब से मैंने ठान ली कि मैं लोगों में साँपों के बारे में जानकारी फैलाउँगा." स्कूल में और फिर कॉलेज में समय निकालकर अनीस साँपों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में पढ़ने लगे. धीरे-धीरे उनके काम का प्रचार होने लगा और मीडिया में ख़बरें छपने लगीं. वे जल्दी ही लोकप्रिय होने लगे. अनीस इस लोकप्रियता के बारे में कहते हैं, "मैंने सोचा था कि हफ़्ते दो हफ़्ते में मुझे एक फोन आया करेगा. दिसंबर से अगस्त तक स्थिति यह होती है कि दिन में 25-30 फोन आते हैं." जागरुकता अनीस बताते हैं कि लोग साँप को सड़क के पास या मैदान में देखते हैं और तुरंत उन्हें फोन करते हैं. और वे लोगों से क्या कहते हैं, इस सवाल पर उन्होंने कहा, "अरे भाई साँप को रहने दो. अगर आप उसे हानि नहीं पहुँचाओगे तो वो भी कुछ नहीं करेगा." अनीस कहते हैं कि स्कूल पाठ्यक्रम में साँपों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती.
अब तो वे स्कूल और कॉलेजों में जाकर साँपों की जानकारी देते हैं. उनका कहना है कि बेवजह लोग साँप को मार डालते हैं. अनीस ने अपने बंगलौर स्थित मकान में कई साँप रखे हैं. इनमें से कुछ ज़हरीले भी हैं. एक मादा साँप जिसके सर पर लोहे के किसी हथियार से वार किया गया था पिछले तीन महीनों से उनकी शरण में है. एक दूसरे छोटे साँप ने वहाँ अंडे दिए थे. इससे पहले एक नाग के अंडों को अनीस ने अपने घर रखा. अंडो से 11 नाग के बच्चे निकले, उनको कुछ दिन अपने घर पालकर अनीस ने उन्हें बंगलौर के पास जंगलों में छोड़ दिया. अनीस के काम से वन विभाग भी संतुष्ट है और साँपों का मामला हो तो वन विभाग भी अब उनकी मदद पर काफी निर्भर होता है. अब तो अनीस के परिवार ने भी साँपों से दोस्ती कर ली है. उनका सात साल का लड़का शोएब बिना किसी हिचक के साँपों के साथ खेलता है. अनीस इस बात से ख़ुश हैं कि उनके काम को सराहा जाता है लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि लोग अभी भी साँपों को ग़लत नज़र से देखते हैं. |
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