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बुश ने मनमोहन सिंह से बात की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की आज़ादी की 60 वीं सालगिरह पर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फ़ोन कर शुभकामनाएँ दी हैं. हालांकि मौक़ा औपचारिक था लेकिन इस मौक़े पर दोनों नेताओं ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते के संबंध में भी बातचीत की. हालांकि इस बातचीत का और विवरण नहीं दिया गया है. लेकिन यह बात जगजाहिर है कि दोनों नेताओं के निजी प्रयासों की वजह से असैनिक परमाणु समझौता यहाँ तक पहुँच पाया है. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति बुश ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बधाई दी. साथ ही उन्होंने भारत में आई बाढ़ पर अपनी संवेदना व्यक्त की. विदेश मंत्रालय के अनुसार इस मौक़े पर दोनों नेताओं ने परमाणु समझौते सहित भारत अमरीका संबंधों की समीक्षा की और बेहतर संबंधों पर संतुष्ट जताई. वामदलों का विरोध दूसरी ओर भारत में यूपीए सरकार के समर्थक वामपंथी दल परमाणु समझौते का कड़ा विरोध कर रहे हैं. साथ ही विपक्षी भाजपा भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है. भारत और अमरीका के बीच असैन्य परमाणु संधि के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रकाश कारत से मंगलवार को मुलाक़ात की. प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने इस मुलाक़ात के बारे में जानकारी देते हुए कहा,'' प्रधानमंत्री ने माकपा महासचिव कारत से नाश्ते पर बातचीत की है और दोनों नेताओं ने परमाणु सौदे के विभिन्न आयामों पर चर्चा की.'' मीडिया सलाहकार ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं ने परमाणु संधि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उभरे मतभेदों को दूर करने का प्रयास करने की भी बात कही है. उल्लेखनीय है कि वामपंथी दलों ने परमाणु संधि के ख़िलाफ़ कड़ा रवैया अपना रखा है और सोमवार को जब प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर बयान दे रहे थे तो वाम दलों ने भी वाकआउट किया था. उधर भाजपा ने परमाणु संधि के मुद्दे पर संसद में नियम 184 के तहत बहस की मांग की है जिसके तहत मतदान का प्रावधान है. इस सिलसिले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमवार को प्रकाश कारत से फ़ोन पर बातचीत भी की थी. हालांकि कारत ने आडवाणी से कहा कि इस संबंध में पार्टी अपनी रणनीति बाद में तय करेगी. |
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