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संघ ने संजू की सज़ा का स्वागत किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) ने फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत छह साल की सज़ा दिए जाने के फ़ैसले का स्वागत किया है. आरएसएस का कहना है कि अवैध रूप से हथियार रखने के मामले में उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए थी. आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र के संपादकीय में संजय दत्त के मामले में मीडिया की भूमिका की जमकर आलोचना भी की. ऑर्गनाइज़र के संपादकीय में कहा गया है- संजय दत्त के मामले में कोई ये नहीं पूछ रहा कि वे अपने घर में एके-56 जैसे हथियार का क्या कर रहे थे. संपादकीय में जज पीजे कोडे की सराहना की गई है और कहा गया है- भारत में हाई प्रोफ़ाइल अभियुक्त ज़्यादातर छूट जाते हैं लेकिन जज पीजे कोडे ने संजय दत्त को सज़ा सुनाकर ये साबित कर दिया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय मिलती है भले ही थोड़ी देर से. राहत ऑर्गनाइज़र में कहा गया है कि संजय दत्त को मिली सज़ा उन 257 लोगों के परिवारों के लिए राहत की बात है, जो 1993 के मुंबई बम धमाके में मारे गए थे. अख़बार ने मुंबई बम धमाके के अलावा बेअंत सिंह हत्याकांड और कोयंबटूर बम धमाके में अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है और इसे राहत की बात कहा है कि दोषियों को सज़ा मिली है. संपादकीय में कहा गया है- मुंबई बम धमाके, बेअंत सिंह हत्याकांड और कोयंबटूर बम धमाके में फ़ैसला निचली अदालत का है और इसे चुनौती दी जा सकती है लेकिन राहत इस बात की है कि कम से कम दोषियों को सज़ा मिली है और उनका चेहरा सामने आ गया है. ऑर्गनाइज़र ने केंद्र की सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की आलोचना की है और कहा है कि वो 'संदिग्ध आतंकवादियों' को राजनीतिक समर्थन दे रहा है. |
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