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मोनिका बेदी एक मामले में बरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोपाल की एक अदालत ने फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामले की अभियुक्त और अबू सलेम की सहयोगी मोनिका बेदी को पुख़्ता सबूत के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है. हालाँकि इसी से जुड़ा एक और मामला मोनिका बेदी के ख़िलाफ़ हैदराबाद की अदालत में चल रहा है जहाँ से ज़मानत मिलने का उन्हें इंतज़ार है. भोपाल के मुख्य दंडाधिकारी अजय श्रीवास्तव ने मोनिका बेदी को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उनके ख़िलाफ़ कोई पुख़्ता सबूत पेश कर पाने में विफ़ल रहा. मोनिका बेदी की वकील पीसी वेदी ने कहा कि इस फ़ैसले के बाद हैदराबाद की अदालत में वह अपने मुवक्किल की रिहाई के लिए अपील करेंगी. हैदराबाद की स्थानीय अदालत ने फ़र्ज़ी पासपोर्ट के मामले में मोनिका बेदी को पाँच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने घटा कर तीन साल कर दिया था. हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए इस मामले में उन्हें ज़मानत पर रिहा करने को मंज़ूरी दे दी थी. मोनिका बेदी को अबू सलेम के साथ सितंबर 2002 में पुर्तगाल में गिरफ़्तार किया गया था. बाद में केंद्र सरकार के अनुरोध पर दोनों को भारत प्रत्यर्पित किया गया. अबू सलेम 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में भी अभियुक्त है. | इससे जुड़ी ख़बरें मोनिका बेदी को पाँच वर्ष की सज़ा29 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मोनिका बेदी भोपाल में पुलिस हिरासत में05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'सालेम की दोस्त नहीं, क़ैदी थी मोनिका'28 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पूछताछ में मौजूद रहने की अनुमति नहीं17 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मोनिका को न्यायिक हिरासत में भेजा गया12 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मॉनिका बेदी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा07 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस अबू सालेम मामले में और स्पष्टीकरण30 अक्तूबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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