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अबू सालेम मामले में और स्पष्टीकरण
मुंबई बम कांड के एक प्रमुख अभियुक्त अबू सालेम के भारत प्रत्यर्पण का मामला पुख़्ता करने के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने पुर्तगाल सरकार को इस बात के सबूत दिए हैं कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ किसी तरह का भेद-भाव नहीं होता है. ब्यूरो ने विभिन्न अदालतों के आदेशों के उल्लेख प्रस्तुत किए हैं जिससे सालेम के ये आरोप झुठलाए जा सकें कि देश में अल्पसंख्यकों के साथ भेद-भाव किया जाता है. ब्यूरो के सूत्रों ने बताया कि पुर्तगाल से प्रॉसिक्यूटर जनरल का एक संदेश मिला था जिसमें सीबीआई से ये माँग की गई थी कि वह इस बात के और सबूत दे कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ भेद-भाव नहीं होता. ब्यूरो सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एमएल पेंडसे के आदेश का उल्लेख पुर्तगाल सरकार को पहले ही भेज चुकी है जिसमें भारत की न्याय प्रणाली की पारदर्शिता के बारे में बताया गया है. तब एजेंसी ने बुधवार को कुछ और स्पष्टीकरण पुर्तगाल सरकार को भेजे हैं जिसमें अन्य आदेशों का उल्लेख भी किया गया है. मुसलमान होने की वजह से प्रताड़ित किए जाने के सालेम के आरोपों को निराधार बताते हुए सीबीआई ने कहा है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और देश में धर्म, जाति या लिंग के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं होता है. सालेम ने मार्टिन लू नाम के एक व्यक्ति को गवाह के तौर पर पेश किया है जिससे ये साबित किया जा सके कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है. मार्टिन लू वही शख़्स हैं जिन्होंने गुलशन कुमार की हत्या के मामले में अभियुक्त नदीम अख़्तर की ओर से बयान दिया था. पुर्तगाल में सालेम के विरुद्ध फ़र्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल से देश में घुसने का मामला भी चल रहा है. साथ ही सीबीआई को भरोसा है कि प्रत्यर्पण की उसकी याचिका पर भी उसके हक़ में ही फ़ैसला होगा. |
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