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मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों का एक साल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले साल 11 जुलाई को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए बम धमाकों के ज़िम्मेदार कई लोग अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं. ग़ौरतलब है कि इस दिन लोकल ट्रेनों में सात धमाके हुए थे जिनमें 187 लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस ने आरोप पत्र तो दायर किया है लेकिन इन धमाकों में शामिल 13 व्यक्तियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू होना अभी बाकी है. मामले की जांच कर रहे महाराष्ट्र पुलिस के चरमपंथी निरोधी दस्ते ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया है. इसके पहले पुलिस ने मामला सुलझा लेने का दावा किया था. पुलिस का कहना था कि हमले के पीछे लश्करे तैयबा का हाथ है और इसे स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया था. पुलिस के विशेष दल ने पिछले साल नवंबर में आरोप पत्र दाखिल किया था. लेकिन आरोप होने की प्रक्रिया कई बार टल चुकी है और अब 30 जुलाई को फिर शुरू होने की उम्मीद है. ग़ौरतलब है कि मुंबई की लोकल ट्रेनों में पिछले साल 11 जुलाई को शाम के समय लगभग एक साथ धमाके हुए थे. प्रथम श्रेणी के डिब्बों में हुए इन धमाकों में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था. इन धमाकों में 187 लोग मारे गए थे. पुलिस का कहना है कि विस्फोटकों को प्रेशर कुकर में रखा गया था. |
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