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सोमवार, 02 जुलाई, 2007 को 18:32 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तान सरकार के सबूत ख़ारिज
रेखांकन
कोर्ट ने सरकारी वकीलों की ओर से पेश सबूतों को खारिज कर दिया है
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जस्टिस चौधरी मामले में सुनवाई करते हुए पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में पेश सबूतों को ख़ारिज कर दिया है.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मार्च में जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी को पद के दुरुपयोग के आरोप में निलंबित कर दिया था.

हालाँकि जस्टिस चौधरी के समर्थकों का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. इसे लेकर पाकिस्तान में पिछले महीनों में कई विरोध-प्रदर्शन भी हुए.

इसके बाद जस्टिस चौधरी ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाते हुए अपने निलंबन के राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दी.

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि वह निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के सरकार के ख़िलाफ़ मुक़दमे की सुनवाई करेगा.

इसी मुक़दमे की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान सरकार के वकीलों की ओर से जस्टिस चौधरी के ख़िलाफ़ जो सबूत पेश किए गए थे, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

बताया जा रहा है कि जिन सबूतों पर सवाल उठ रहे हैं उनका ताल्लुक जस्टिस चौधरी की निजी ज़िंदगी से है.

नाराज़ कोर्ट

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जस्टिस चौधरी
जस्टिस चौधरी ने अपने निलंबन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है

कोर्ट ने सरकारी वकीलों की ओर से जस्टिस चौधरी के ख़िलाफ़ पेश इस सबूतों को लज्जाजनक बताते हुए इन्हें ख़ारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने न्यायालय परिसर में जाँच अधिकारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है

साथ ही यह भी आदेश दिए गए हैं कि वरिष्ठ न्यायाधीशों के घरों और कार्यालयों की जाँच की जाए कि वहाँ छोटे डिवाइस तो नहीं लगाए गए हैं.

जानकार मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का यह क़दम जस्टिस चौधरी के लिए राहत और पाकिस्तान सरकार के लिए एक झटका है.

पृष्ठभूमि

मई माह के शुरू में निलंबन के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में कराने की जस्टिस चौधरी की अपील स्वीकार कर ली गई थी.

प्रदर्शन
जस्टिस चौधरी के समर्थन में कई प्रदर्शन हुए

सुप्रीम कोर्ट को सौंपे दस्तावेज़ में जस्टिस चौधरी ने कहा था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कदाचार के कथित आरोपों की आड़ में उन पर इस्तीफ़ा देने के लिए दबाव बनाया.

उनका कहना था कि जब उन्होंने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया तो उन्हें ख़ुफ़िया विभाग ने पाँच घंटे तक ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से हिरासत में रखा.

जस्टिस चौधरी ने अदालत को दिए हलफ़नामे के ज़रिए निलंबन के समय के घटनाक्रम का उल्लेख किया था.

निलंबित मुख्य न्यायाधीश के वक़ील ने अदालत में कहा था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ उनके मुवक्क़िल के ख़िलाफ़ 'निजी द्वेष' रखते हैं.

जस्टिस जौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और इसे मुशर्रफ़ के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती माना गया है.

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