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शनिवार, 12 मई, 2007 को 17:12 GMT तक के समाचार
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कराची में 34 मारे गए, चौधरी लौटे
हिंसा
कराची में जम कर हिंसा हुई है
पाकिस्तान की वाणिज्यिक राजधानी कहे जाने वाले शहर कराची में रैली करने पहुँचे निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को हवाई अड्डे पर रोक लिया गया है.

रैली से पहले सरकार विरोधी और सरकार समर्थक राजनीतिक पार्टियों के बीच हिंसा हुई जिसमें 34 लोगों की जान चली गई और 100 से ज़्यादा घायल हो गए. कई वाहनों को भी आग लगा दी गई.

इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी शनिवार को कराची में रैली को संबोधित करने वाले थे लेकिन उन्हें हवाई अड्डे पर ही रोक लिया गया और वह रैली को संबोधित नहीं कर सके.

ख़बरें मिली हैं कि दिन भर इंतज़ार के बाद चौधरी इस्लामाबाद लौट गए.

शहर में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए करीब पंद्रह हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. विभिन्न राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि रैली से पहले उनके लगभग 500 कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है.

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ की समर्थक मानी जाने वाली पार्टी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट यानी एमक्यूएम ने अशांति फैलाई है लेकिन एमक्यूएम ने इन आरोपों का खंडन किया.

ऐसी ख़बरें मिली हैं कि एमक्यूएम और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यकर्ताओं में लगभग एक घंटे तक लड़ाई हुई है.

एक निजी टेलीविज़न समाचार चैनल 'आज' के दफ़्तर पर भी गोलियाँ चलाई गईं और उस घटना की तस्वीरें इस चैनल पर दिखाई गईं.

आज टीवी चैनल के एक पत्रकार तलत हुसैन ने एक दीवार के पीछे से प्रसारण करते हुए बताया, "हम पर हमला किया गया है, कोई सुरक्षाकर्मी आसपास मौजूद नहीं है और कोई भी हमारी मदद के लिए नहीं आया है."

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि विपक्षी दलों ने जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के मुद्दे को सैन्य शासन के ख़िलाफ़ि एक अभियान का रूप दे दिया.

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता सरदार रहीम ने बीबीसी से कहा कि लोगों को निशाना बनाकर हमले किए गए ताकि जस्टिस चौधरी के समर्थकों को रैली में आने से रोका जा सके.

पीएमएल (नवाज़) के एक समर्थक की अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार कर हत्या कर दी गई. एक अन्य घटना में कराची के मॉडल कालोनी में हुई गलीबारी में एक व्यक्ति मारा गया और तीन अन्य घायल हो गए.

दरअसल इफ़्तिख़ार चौधरी की रैली के अलावा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थन में भी शनिवार को ही रैली होने वाली थी जिससे दोनों गुटों के बीच टकराव की आशंका थी.

मुशर्रफ़ का विरोध

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोप में नौ मार्च को मुख्य न्यायाधीश पद से बर्ख़ास्त कर दिया था.

उसके बाद से वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन किए हैं.

इससे पहले लाहौर में आयोजित रैली में उन्हें व्यापक समर्थन मिला था और उसके बाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ चल रही जाँच को स्थगित करने का आदेश दिया था.

लाहौर में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए जस्टिस चौधरी ने कहा था कि जो तानाशाह क़ानून को नज़रअंदाज़ करते हैं, वे 'तबाह' हो जाते हैं.

हालाँकि इफ़्तिख़ार चौधरी ने सीधे-सीधे तौर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का नाम नहीं लिया.

उन्होंने कहा था, "संविधान के बजाय जिस देश की बुनियाद तानाशाही पर बनती है, वहाँ न क़ानून का पालन होता है और मूल अधिकारों की भी रक्षा नहीं होती. जो देश अपने अतीत से सबक नहीं लेते और ग़लतियाँ दोहराते हैं, उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है."

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