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राजस्थान में गतिरोध ख़त्म होने के आसार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रविवार को दिनभर चली कश्मकश के बाद गूजर नेताओं ने राजस्थान सरकार से बातचीत का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. सरकार ने बातचीत को निर्णायक मोड़ देने के लिए गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच बातचीत आज होगी. क्योंकि किरोड़ी सिंह बैंसला रविवार देर रात जयपुर पहुँचे. राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वो अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं. पिछले दिनों इस मांग ने हिंसक रूप ले लिया था और अभी तक हिंसा में 23 लोगों की मौत हो चुकी है. कई दिनों के बाद अब गूजर नेता बैंसला बातचीत के लिए तैयार हुए हैं. इस बीच दिल्ली में गूजर नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस नेतृत्व से मुलाक़ात की और अपनी मांगें रखीं. जंतर-मंतर पर गूजरों ने प्रदर्शन भी किया. तनाव रविवार को ग्रामीण क्षेत्रों में परस्पर विरोधी जाति पंचायतों के आयोजन से तनाव पैदा हो गया था. इन पंचायतों में हथियारों से लैस हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया और अपनी जाति का गौरव गान किया. दौसा के पाटोली में धरना दिए गूजरों की रसद आपूर्ति रोके जाने से एक बार तनाव बढ़ गया था और बातचीत का भविष्य भी खटाई में पड़ गया था.
लेकिन बाद में इसे बहाल कर दिया गया. गूजर पंचायत की अनुमति के बाद 29 मई को हुई हिंसा में मारे गए छह लोगों का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया. लेकिन जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग अभी भी अवरुद्ध है और आंदोलनकारी किसी भी वाहन को आने-जाने नहीं दे रहे. आंदोलनकारियों का कहना है कि वे आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और इसलिए वे रास्ता तो जाम करेंगे ही. उनका कहना है कि जब तक इस इलाक़े में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नहीं आती हैं, वे रास्ता जाम रखेंगे. सड़कों पर हज़ारों वाहन फँसे पड़े हैं और लोग मदद के लिए गुहार कर रहे हैं. इस चक्का जाम में फँसे लोगों की हालत पर गूजर नेताओं का दिल भी अब पसीजने लगा है. गूजरों के प्रमुख वार्ताकार डॉक्टर रूप सिंह कहते हैं, "हमारी उन बच्चों के साथ बहुत सहानुभूति है, जिनकी परीक्षा चल रही है. हमारी उन रोगियों के साथ भी सहानुभूति है जो अस्पताल नहीं पहुँच पाए. लेकिन यह एक सरकार की हठधर्मिता के कारण हुआ है." इस बीच भारतीय जनता पार्टी के गूजर मंत्री और विधायक पार्टी हाईकमान को हालात की गंभीरता से अवगत कराने दिल्ली गए हैं. इन विधायकों ने मौजूदा हालत के लिए अपनी ही सरकार को ज़िम्मेदार बताया है. दिल्ली में प्रदर्शन गूजर समुदायों के हज़ारों लोगों ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर राजस्थान के गूजरों के साथ सहानुभूति प्रकट की.
दूसरी ओर कांग्रेस के दो गूजर सांसदों सचिन पायलट और अवतार सिंह भडाना के नेतृत्व में सभी दलों के प्रतिनिधि बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिलने गए. इन लोगों ने बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने मांग रखी कि वे तुरंत राजस्थान के मामले में हस्तक्षेप करें. राजनाथ सिंह से मिलने के बाद गूजरों की ओर से अवतार सिंह भडाना ने पत्रकारों से बात की. उन्होंने बताया, "राजनाथ सिंह ने इस बात का आश्वासन दिया है कि जो कुछ भी राजस्थान में हो रहा है, उसे वे गंभीरता से लेंगे." लेकिन अवतार सिंह का ये भी कहना था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे भारत सरकार से मांग करेंगे कि जो सरकार क़ानून-व्यवस्था नहीं बहाल रख सकती, उस सरकार को बर्ख़ास्त कर देना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी की ओर से पत्रकारों से बात की प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने. उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में सभी पार्टियों के नेता थे और उन्होंने राजस्थान की स्थिति पर चिंता व्यक्त की. रविशंकर प्रसाद ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि आवश्यकता इस बात की है कि सभी लोग मिलकर इस मुद्दे पर शांति और सदभावना से विचार करें और सामाजिक तनाव को कम करने की कोशिश करें. इन गूजर प्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेतृत्व से भी मुलाक़ात की और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की. सोमवार को कुछ गूजर संगठनों ने दिल्ली बंद का आह्वान किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली में गूजरों का प्रदर्शन, बीजेपी अध्यक्ष से मिले03 जून, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान के हालात के लिए ज़िम्मेदार कौन?02 जून, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान के 11 ज़िलों में रासुका लागू02 जून, 2007 | भारत और पड़ोस वसुंधरा के लिए सांप छछूंदर वाली स्थिति03 जून, 2007 | भारत और पड़ोस तीसरे दौर की बातचीत विफल01 जून, 2007 | भारत और पड़ोस गूजर-मीणा समुदाय में झड़पें, पाँच मरे01 जून, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान में चार और लोगों की मौत31 मई, 2007 | भारत और पड़ोस दूसरे दौर की बातचीत बेनतीजा रही31 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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