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दूसरे दौर की बातचीत बेनतीजा रही | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में गूजरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलनकारी नेताओं और सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका. अब गूजर संघर्ष समिति के नेताओं के साथ तीसरे दौर की बातचीत शुक्रवार को होगी. जयपुर में राजस्थान सरकार द्वारा गठित चार मंत्रियों के समूह के साथ आंदोलनकारियों की गुरुवार रात दूसरे दौर की दो घंटे तक बातचीत चली लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका. इधर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर राज्य के सभी समुदायों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की गई. चार की मौत ग़ौरतलब है कि राजस्थान में गूजर समुदाय अनुसूचित जनजाति में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर है. बुधवार को सवाई माधोपुर में गूजर समुदाय के लोग और पुलिस आमने सामने थी. इस दौरान हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई.
इसके पहले दौसा में मंगलवार को गूजर समुदाय और पुलिस के बीच संघर्ष के बाद फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई थी. इस बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान की स्थिति की समीक्षा की. केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बातचीत की और ताजा हालात की जानकारी ली. गृह मंत्रालय ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को सुरक्षा कड़ी करने के लिए पहले ही सतर्क कर दिया है ताकि गूजर आबादी वाले इन राज्यों में हिंसा फैलने न पाए. राजस्थान के कई शहरों में तनाव की स्थिति बनी हुई है और सुरक्षाबल स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं. आरक्षण पर विवाद अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल गूजरों का कहना है कि उन्हें इस वर्ग में रहकर आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है और अब उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए. सत्ता में आने से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने इसका आश्वासन दिया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है. भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने जयपुर में पत्रकारों से कहा कि यह बात चुनावी घोषणापत्र में तो नहीं थी लेकिन आरक्षण में मदद का वादा ज़रूर किया गया था. इस बीच गुरुवार को राज्य के खाद्यमंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा है कि अनुसूचित जनजाति के लोग आरक्षण में बँटवारे के लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि आदिवासी विधायक इसे लेकर पहले से ही एकजुट हैं. उल्लेखनीय है कि मीणा समुदाय अनुसूचित जनजाति में शामिल है और पिछले दशकों में इस समुदाय को आरक्षण का बहुत लाभ मिला है. |
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