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'क्या आपको मुझसे ज़्यादा जानकारी है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्या आपको वो बातें पता हैं जो मैं नहीं जानती? आप पत्रकार लोग होमवर्क भी ठीक से नहीं करते... ये अंदाज़ और तेवर थे मायावती के जो दिल्ली के पॉश ओबेरॉय पाँचतारा होटल में उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद पहली बार ख़बरनवीसों से रूबरू हो रहीं थीं. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस बार अपने दमखम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है. पार्टी की अगुआई कर रहीं मायावती को बखूबी पता है कि 16 साल के लंबे अंतराल के बाद किसी एक पार्टी को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिला है. चुनावी गणित में दलित-ब्रह्मण गठजोड़ से विपक्षी दलों को चारों खाने चित कर पार्टी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली बहन जी (मायावती) के तेवर तल्ख़ होते हैं ये सब जानते हैं लेकिन इस बार वो कोई भी तीर संभल कर चला रही हैं. लिखित व्यक्तव्य के ज़रिए ज्योतिबा फूले से लेकर नारायण गुरु और बाबा साहब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद जब उन्होंने पत्रकारों के लिए मंच खोल दिया तो सवालों की बौछार होने लगी. मीडिया बना निशाना क्या आप रिलायंस एसईज़ेड का प्रस्ताव करने वाले आईएस अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई करेंगी? तभी एक और आवाज़ आई, आप सिर्फ़ मुलायम सिंह यादव को निशाना बना रही हैं क्या.. इस पर बहनजी का जवाब आया, "मैंने कब मुलायम सिंह का नाम लिया. आप बिना होमवर्क किए आते हैं और सवाल पूछते हैं." सफ़ेद लिबास पहने मायावती के आजू-बाजू उनके दाहिने हाथ कहे जाने वाले सतीशचंद्र मिश्र और सुधीर गोएल भी बैठे थे. तो शायद मौके को भाँपते हुए एक पत्रकार ने पूछ दिया, "क्या आप सतीश जी को उपमुख्यमंत्री बनाएंगी. जवाब मिला, क्या आपको ऐसी कोई जानकारी है जो मुझे नहीं पता." बगल में बैठे सतीश चंद्र मिश्र मायावती के कानों में कुछ फुसफुसाए जिसके बाद बहनजी ने अपनी ओर से सवाल दागा, "आपको शायद कुछ अलग से ख़बर मिलती है. जिस तरह आप लोगों ने सर्वे के रिजल्ट निकाल लिए थे.." पत्रकार थोड़े सकपकाए लेकिन एक ने फिर साधारण सा सवाल किया कि क्या वो दिल्ली में प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा किसी और से मिलेंगी. शायद पत्रकारों को जैसी आशंका थी वैसा ही जवाब आया, "मुझे नहीं पता. मेरी केवल दो मीटिंग है. आगर आपने किसी से बात करके कुछ फिक्स किया है तो मुझे बता दीजिएगा." मुलायम सिंह या अनिल अंबानी के ख़िलाफ़ कुछ 'उगलवाने' की कोशिशें नाकाम हो गईं. वो यही कहती रहीं कि नियम के ख़िलाफ़ कुछ हुआ है तो कार्रवाई होगी. नोएडा भू आवंटन, ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित हवाई अड्डा, नए बिजली संयंत्र जैसे कई मुद्दे उठाए गए लेकिन विपक्ष पर आपा खोने के बजाए बहनजी ने स्थिति को नियंत्रण में रखा. हाँ मीडिया की विफलताओं को उजागर करने में वो कभी नहीं चूकीं. |
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