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निजी सवालों पर पुनर्विचार होगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में महिला प्रशासनिक अधिकारियों में इस बात को लेकर रोष है कि उनसे मासिक-धर्म संबंधी जानकारी देने के लिए कहा जा रहा है. केंद्र सरकार के अधिकारियों के कामकाज के सालाना आकलन (अप्रेज़ल) के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में नए प्रावधानों के मुताबिक़ महिला अफ़सरों को मासिक-धर्म के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी. भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कामकाज का वार्षिक आकलन और उनकी स्वास्थ्य जाँच अनिवार्य है इसलिए इस फॉर्म को भरने से बचना अधिकारियों के लिए असंभव है. महिला अधिकारियों की नाराज़गी सामने आने पर केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने मामले पर पुनर्विचार की बात कही है.
मंत्रालय के सचिव सत्यानंद मिश्र ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा, "यह फॉर्म 31 मार्च 2008 से लागू होगा और इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से सलाह ली गई थी, पहली बार 40 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकारियों के स्वास्थ्य जाँच को अनिवार्य किया गया है." उन्होंने कहा, "महिला अधिकारियों ने इन सवालों को असंवेदनशील बताया है और हम उनकी आपत्तियों को देखते हुए मामले पर पुनर्विचार कर रहे हैं." इस पूरे विवाद की जड़ में अप्रेजल फॉर्म का 58वाँ पन्ना है जिसे केंद्रीय कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन मंत्रालय ने जारी किया है. फॉर्म में निर्देश दिए गए हैं कि महिला अधिकारी अपने मासिक धर्म के बारे में विस्तृत जानकारी दें जिसमें पिछले मासिक धर्म की तारीख़ सहित मातृत्व अवकाश आदि के बारे में पूर्ण विवरण शामिल हो. हैरत बीबीसी से जिन महिला प्रशासनिक अधिकारियों ने बात की उनका यही कहना था कि इस तरह की निजी जानकारी माँगी गई है वह किसी दृष्टि से उचित नहीं है.
महाराष्ट्र की पर्यावरण सचिव श्रवरी गोखले ने कहा, "मैं तो सकते में हूँ, मेरे पास शब्द नहीं हैं अपनी भावनाएँ व्यक्त करने के लिए, मेरा कोई इरादा नहीं है अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानकारी देने का." महाराष्ट्र सरकार की संयुक्त सचिव सीमा व्यास का कहना है कि इस तरह के सवाल पूछने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी. वे कहती हैं, "इसका हमारे कामकाज से कोई लेना-देना नहीं है. जब महिला अधिकारी मातृत्व अवकाश का आवेदन देती है तो उसमें सारे विवरण देने होते हैं फिर अलग से ऐसे सवाल पूछने की क्या ज़रूरत है?" |
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