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'फ़ैसले लेने में महिलाओं की हिस्सेदारी नहीं'

महिलाएँ
भारत में महिलाएँ की स्थिति कुछ सुधरी हैं लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना है
संयुक्त राष्ट्र बालकोष यानी यूनिसेफ़ का कहना है कि भारत में महिलाएँ प्रतिदिन पुरुषों से औसतन एक घंटा छह मिनट अधिक काम करती हैं.

इसके बावजूद स्वास्थ्य, विवाह की उम्र, महिला-पुरुष जनसंख्या अनुपात और शिक्षा जैसे क्षेत्र में उनकी स्थिति चिंताजनक है.

यूनिसेफ़ ने दुनिया के बच्चों के बारे में वर्ष 2007 की रिपोर्ट में कहा है कि भारत के कुछ सबसे संपन्न राज्यों में सबसे ख़राब जनसंख्या अनुपात हैं.

देश में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 934 है लेकिन पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में यह आँकड़ा काफ़ी कम है.

दूसरी ओर इन राज्यों में प्रतिव्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 20 प्रतिशत अधिक है.

हरियाणा और पंजाब के 14 ज़िलों में तो प्रति एक हज़ार लड़कों पर लड़कियों की जनसंख्या 800 से भी कम है.

यूनिसेफ़ का कहना है कि महिलाओं की कम जनसंख्या का मतलब है कि उनकी जल्दी शादी होगी, बीच में पढ़ाई छोड़नी होगी और वो कम उम्र में ही माँ बन जाएंगी.

यही नहीं इससे महिलाओं के प्रति हिंसा, बलात्कार और अपहरण की घटनाएं बढ़ने के साथ ही बहुपति व्यवस्था को बढ़ावा मिलता है.

चिंताजनक स्थिति

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि लड़कियों की साक्षरता के मोर्चे पर थोड़ी सफलता मिली है. लेकिन उन्हें स्कूल बीच में ही छोड़ने से रोकने की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.

रिपोर्ट के अनुसार स्कूल में दाखिला लेने वाली 100 में से केवल 30 लड़कियाँ ही प्राथमिक शिक्षा पूरी कर पाती हैं. अति पछड़ों और अनुसूचित जनजाति की बात करें तो छह करोड़ महिलाएँ निरक्षर हैं.

रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि महिलाएँ पुरुषों के मुकाबले अधिक काम करती हैं लेकिन फ़ैसले लेने में इनकी भूमिका काफ़ी कम होती है.

वर्तमान लोकसभा में महिलाओं की संख्या 8.3 प्रतिशत है. इसके अलावा वर्ष 2002 में मिलने वाली सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी महज़ 18 प्रतिशत रही.

भारता में लड़कियों के विवाह की औसत उम्र साल-दर-साल बढ़ रही है लेकिन अभी भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. चार में से एक लड़की की शादी 15 से 19 वर्ष की उम्र में हो जाती है.

पंजाब में तो पिछले सात वर्षों में आश्चर्यजनक रूप से 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की शादी किए जाने के मामले बढ़े है.

वर्ष 1998-99 में यह आँकड़ा जहाँ 12 प्रतिशत था और 2005-06 में बढ़कर यह 19 प्रतिशत हो गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह पंजाब में लड़कियों की जनसंख्या अनुपात में गिरावट हो सकती है.

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