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'अफ़ग़ान महिलाओं की स्थिति नहीं सुधरी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महिलाओं के अधिकारों की पक्षधर एक अंतरराष्ट्रीय संस्था 'विमनकाइंड इंटरनेशनल' ने कहा है कि वर्ष 2001 के बाद अंफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं हुए हैं. इस संगठन का कहना है कि उस समय तालेबान को सत्ता से बाहर करते समय महिलाओं की दी गई 'गारंटी' यानि उनसे किए गये वायदों के बाद वहाँ असल बदलाव नहीं हुआ है. संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लाखों अफ़ग़ान महिलाएँ और बच्चे अब भी अपने घरों और समाज में व्यवस्थित ढंग से हो रहे भेदभाव और हिंसा के शिकार हैं. 'विमनकाइंड इंटरनेशनल' का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं को कुछ क़ानूनी, नागरिक और संवैधानिक फ़ायदे हुए हैं. लेकिन ये भी कहा गया है कि महिलाओं की सुरक्षा और समाज में उनकी प्रतिष्ठा की दृष्टि से अनेक गंभीर चुनौतियाँ बाक़ी हैं. नागरिक और राजनितिक अधिकार इस संगठन का मानना है कि महिलाओं को असल रूप में नागरिक और राजनीतिक अधिकार मिलने के मुद्दे का तत्काल समाधान किए जाने की ज़रूरत है. रिपोर्ट में उदाहरण दिए गए हैं कि किस तरह प्रगतिशील महिला सांसद या फिर वे महिलाएँ जो राजनीति में भाग लेना चाहती हैं, उन्हें धमकियों और डर का सामना करना पड़ा है. कई महिला राहतकर्मियों की हत्या कर दी गई है और कई प्रांत तो वर्ष 2001 के मुकाबले में महिलाओं के लिए और असुरक्षित हो गए हैं. अफ़ग़ानिस्तान में 57 प्रतिशत लड़कियों की शादी 16 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है. वहाँ क़ानून के मुताबिक लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 16 वर्ष है. रिपोर्ट के अनुसार एक ओर व्यापक घरेलू हिंसा हो रही है और दूसरी ओर प्रशासन ऐसे मामलों की कभी-कभी ही जाँच करता है. बलात्कार के मामले में शिकायत करने वाली महिलाओं को ही विवाह के बाहर यौन संबंध बनाने के लिए जेल में बंद कर दिया जाता है. |
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