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तीन में से दो बच्चों के साथ 'दुर्व्यवहार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार द्वारा करवाए गए एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण के अनुसार भारत में हर तीन में से दो बच्चे शारीरिक दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं. भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 53 फ़ीसदी बच्चों ने कहा कि वे एक या अधिक रुप में यौन दुराचार के शिकार हुए हैं. बच्चों के साथ दुराचार के मसले पर सरकार की ओर से पहली बार इतना व्यापक सर्वेक्षण करवाया गया है. भारत में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और ख़ासकर यौन दुराचार के मामलों की बहुत कम शिकायतें की जाती हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस सर्वेक्षण का स्वागत किया है. इस सर्वेक्षण रिपोर्ट को जारी करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मंत्री रेणुका चौधरी ने एक पत्रकारवार्ता में कहा, "भारत में बच्चों के साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार से इनकार करने की एक परंपरा है. अक्सर वही होता है जो हम नहीं कहते." उनका कहना था, "ख़ामोश रहकर हमने इस समस्या को बढ़ावा ही दिया है." इस सर्वेक्षण के नतीजों को 'विचलित' करने वाला बताते हुए रेणुका चौधरी ने कहा कि "ख़ामोशी के इस षडयंत्र" को ख़त्म करने की ज़रुरत है. हालांकि स्वंयसेवी संगठन बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के मामले को समय-समय पर उठाते रहे हैं लेकिन पहली बार है कि सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर दस्तावेज़ तैयार करवाने की कोशिश की है. बड़ा सर्वेक्षण यह सर्वेक्षण दो सालों में पूरा हुआ है. इसमें 13 राज्यों में पाँच से 12 साल के 12,247 बच्चों और 12 से अधिक उम्र वाले 2,324 युवाओं से बात की गई. इस रिपोर्ट को मंत्रालय में बाल कल्याण विभाग की अधिकारी लवलीन कक्कड़ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है.
वे कहती हैं कि इस रिपोर्ट से पहली बार यह बात सामने आई है कि सिर्फ़ लड़कियाँ दुर्व्यवहार की शिकार नहीं होतीं इसका शिकार लड़के भी उतने ही होते हैं. उनका कहना था कि इस दुर्व्यवहार के लिए अक्सर वो लोग दोषी होते हैं जो 'भरोसे के होते हैं और जिन पर देखभाल की ज़िम्मेदारी होती है'. इनमें अभिभावक, रिश्तेदार और स्कूली शिक्षक शामिल हैं. डॉ कक्कड़ का कहना था कि यह विचलित करने वाला तथ्य था कि 70 प्रतिशत मामलों में बच्चों ने किसी से शिकायत ही नहीं की. इस सर्वेक्षण में शारीरिक और यौन दुर्व्यवहार के अलावा भावनात्मक दुर्व्यवहार और लड़कियों की उपेक्षा को भी शामिल किया गया. झिझक बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सर्वेक्षण का स्वागत करते हुए कहा है कि भारत में इस रिपोर्ट की सख़्त आवश्यकता थी. 'प्लान इंटरनेशनल' के कंट्री डायरेक्टर रोनॉल्ड एंगेरर ने बीबीसी से कहा, "महत्वपूर्ण यह है कि सरकार ने इस मुद्दे को उठाया." उनका कहना था, "यह महत्वहीन है कि आँकड़े क्या कहते हैं. दुर्व्यवहार का शिकार होने वाले बच्चों की संख्या 75 प्रतिशत है या 58 प्रतिशत. हर बच्चे के साथ दुर्व्यवहार अपने आपमें बहुत बड़ी बात है." भारत में अभिभावक ये स्वीकार करने में झिझकते हैं कि उनके बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हुआ. और यह बात तो हमेशा दबा ली जाती है कि परिवार के किसी सदस्य ने किसी बच्चे के साथ दुराचार किया. शायद इसीलिए सर्वेक्षण में भाग लेने वाले बड़े बच्चों में से 50 प्रतिशत ने कहा कि यह घर का मामला है और इसे घर में ही रहने देना चाहिए. केवल 17 प्रतिशत बड़े बच्चे ही ऐसे थे जिनका कहना था कि इस मामले में दुर्व्यवहार करने वालों को सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए. भारत में दुनिया के 19 प्रतिशत बच्चे रहते हैं और इस समय देश की आबादी का एक तिहाई हिस्सा 18 साल से कम उम्र के बच्चों का है. सर्वेक्षण के अनुसार 40 प्रतिशत बच्चों को सुरक्षा और देखभाल की ज़रुरत है. | इससे जुड़ी ख़बरें सीबीआई ने निठारी कांड की जाँच शुरू की12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस श्योपुर में 58 फ़ीसदी बच्चे कुपोषित27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बच्चों के सामने पहाड़-सी ज़िंदगी08 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस नाज़ुक कंधों पर बंदूकों का बोझ14 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस गुजरात के बच्चे अभी भी परेशानी में07 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस बच्चों का दाख़िला बच्चों का खेल नहीं15 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस 'यूनिसेफ़-सरकार ज़िम्मेदार' | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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