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श्योपुर में 58 फ़ीसदी बच्चे कुपोषित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक समिति ने कहा है कि बच्चों की मृत्यु दर के मामले में मध्यप्रदेश के श्योपुर ज़िले की तुलना अफ़्रीका के सबसे ग़रीब और पिछड़े इलाकों से की जा सकती है. जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार के आँकड़ों का हवाला दिया है. इसमें कहा गया है कि श्योपुर में छह वर्ष तक की उम्र के 100 बच्चों में से 58 भुखमरी के शिकार हैं. समिति ने कहा है कि यदि सरकार ने समय रहते कारगर कदम नहीं उठाए तो श्योपुर में स्थिति भयावह हो सकती है, क्योंकि इस मानसून में वहाँ अच्छी बारिश नहीं हुई है. राजस्थान की सीमा से लगा चम्बल का यह इलाका मध्य प्रदेश के पिछड़े इलाकों में गिना जाता है. राज्य की मानव विकास रिपोर्ट में भी इसे प्रदेश के 45 जिलों में से 33वें स्थान पर रखा गया है. इस क्षेत्र में सबसे अधिक जनसंख्या अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की है. इनमें सहरिया आदिवासी बड़ी संख्या में हैं. जाँच समिति ने स्पष्ट किया है कि भुखमरी प्रभावित सबसे अधिक बच्चे सहरिया हैं. हर 100 बच्चों में से 93 कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, “यह भारत के जंगली और पहाड़ी इलाकों, जहाँ अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग रहते हैं, में ग़रीबी और भुखमरी का द्योतक है.” सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन कहते हैं कि हाल में यह बात साफ़ होती जा रही है कि सरकारों की ग़लत नीतियों के कारण कभी रोज़गार और भुखमरी का नाम तक न जानने वाले आदिवासी भी अब इसका शिकार हो रहे हैं. फ़टकार अपने श्योपुर दौरे में कुपोषण से हुई मौतों से रूबरू होने के बाद समिति ने ऐसी मौतों पर पर्दा डालने के लिए प्रशासन को आड़े हाथों लिया है. समिति ने कहा है कि सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के बीच मौतों को ‘सही’ अथवा ‘गलत’ साबित करने की मशक्क़त बेमानी है. आँकड़ों से साफ़ है कि श्योपुर भुखमरी से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है. इस रिपोर्ट के आने के चंद दिन पहले ही मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई ने श्योपुर में भुखमरी से किसी मौत की बात से विधानसभा में इंकार किया था. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री कुसुम मेदमे ने कहा कि उन्होंने जाँच समिति की रिपोर्ट तो नहीं देखी है, लेकिन अगर श्योपुर ज़िले में उनके विभाग के काम में कोई कमी है तो वह उसे दूर करवाएंगी. | इससे जुड़ी ख़बरें मध्य प्रदेश में भूख से मौतें | भारत और पड़ोस कुपोषण से बच्चों की बढ़ती मौत07 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस 'विकास के फ़ायदे ग़रीबों तक नहीं'07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस गोद लेने पर भी मातृत्व अवकाश18 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भूखे को मिलेगा मुफ़्त खाना26 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पोलियो के सौ नए मामलों से हड़कंप25 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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