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पोलियो के सौ नए मामलों से हड़कंप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पोलियो उन्मूलन के कई अभियानों के बावजूद भारत से इस वायरस का सफ़ाया नहीं हो सका है और एक महीने में 100 से अधिक नए मामले सामने आने से अधिकारियों की नींद उड़ गई है. देश में हाल ही में पोलियो के एक के बाद एक नए मामले सामने आने से भारतीय अधिकारियों की चिंता बढ़ गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक महीने में पोलियो के 119 नए मामले सामने आए हैं और इसके वायरस से प्रभावित बच्चों की तादाद बढ़कर 416 हो गई है. पोलियो का वायरस पांच साल तक के बच्चों पर हमला करता है और उनके तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है. इससे बच्चे को लकवा भी मार सकता है. दुनिया भर में पोलियो के एक हज़ार 449 मामलों में से एक तिहाई भारत में ही हैं और इस नाते भारत पोलियो के ख़िलाफ़ जंग जीतने में सबसे बड़ी बाधा के रूप में सामने आ रहा है. ख़ासकर देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में स्थिति सबसे ख़राब है और वहाँ पोलियो के 358 मामले दर्ज किए गए हैं. फैलता वायरस पहले यह माना जाता था कि पोलियो का वायरस उत्तर प्रदेश के पश्चिम में कुछ हिस्सों तक सीमित है, लेकिन अब स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के 70 ज़िलों में से 40 इस वायरस की गिरफ़्त में हैं. उत्तर प्रदेश का पड़ोसी राज्य बिहार इस मामले में दूसरे स्थान पर है और वहाँ पोलियो के 28 मामले प्रकाश में आए हैं. राजधानी दिल्ली और मुंबई में भी वायरस की मौजूदगी का पता चलने के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस ख़ास क्षेत्र से बाहर निकल गया है और उत्तर और पश्चिम भारत के बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है. अधिकारियों का कहना है कि पोलियो से अधिक प्रभावित राज्यों के बच्चों के देश के दूसरे हिस्सों में जाने से ही वायरस का प्रभाव क्षेत्र बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, “देश के दूसरे हिस्सों में बच्चों के जाने से ही पोलियो वायरस बिहार और उत्तर प्रदेश से बाहर गया है. दिल्ली और मुंबई में हाल ही में नए मामलों को इनसे जोड़ा जा सकता है.” विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषण, गंदगी और पर्यावरण पोलियो वायरस के फैलाव की बड़ी वजहें हैं. चिंता विशेषज्ञ कहते हैं कि पोलियो के मामले उन स्थानों पर अधिक पाए गए हैं, जहां सफ़ाई एक मसला है और अधिकतर मामले उन ग़रीब परिवारों से हैं, जो अपने बच्चों को पौष्टिक आहार देने में अक्षम हैं. उनका कहना है कि विकसित देशों में जहां बच्चों को पोलियो प्रतिरक्षण की तीन ख़ुराक देना पर्याप्त है, वहीं भारत में 10 बार ये दवा पिलाने से बच्चे को पोलियो के ख़तरे से बचाया जा सकता है. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दिल्ली में एक बच्ची ने नौ बार पोलियो प्रतिरक्षण की ख़ुराक ली थी, फिर भी उसे वायरस ने जकड़ लिया. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम अभी यह जाँच परख रहे हैं कि ये कैसे हुआ. हो सकता है कि जिस बच्ची के साथ यह घटना घटी वह दवा पीने के दौरान डायरिया से पीड़ित थी.” पोलियो के नए मामलों की यह संख्या इस मायने में भी अधिकारियों की नींद उड़ाने वाली है कि पिछले साल देशभर में सिर्फ़ 66 मामले ही प्रकाश में आए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तर प्रदेश में पोलियो मामलों में बढ़ोतरी05 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश है पोलियो का गढ़ | भारत और पड़ोस स्वास्थ्य संगठन का पोलियो अभियान 07 मई, 2006 | भारत और पड़ोस पोलियो हटाने के लिए आपात बैठक15 जनवरी, 2004 | विज्ञान 'इस साल के अंत तक पोलियो का सफ़ाया'04 अगस्त, 2004 | विज्ञान भारत में पोलियो टीकाकरण अभियान21 नवंबर, 2004 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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