|
भारत में पोलियो टीकाकरण अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से पोलियो के उन्मूलन के लिए तीन दिन का राष्ट्रव्यापी अभियान भारत में शुरू हो गया है. भारत में पाँच वर्ष से कम उम्र के 17 करोड़ से अधिक बच्चों को इस दौरान पोलियो की दवा दी जाएगी. भारत में 2002 में पोलियो के संक्रमण में दोबारा बढ़ोतरी शुरू हुई थी लेकिन इस बार लग रहा है कि व्यापक अभियान के ज़रिए रोग को रोका जा सकेगा. भारत के अलावा कई अफ्रीकी देशों में भी आठ करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक देने का अभियान चल रहा है. पिछले वर्ष के पोलियो अभियान में लगभग नब्बे प्रतिशत बच्चों को पोलियो की खुराक़ दी गई थी, इस बार स्वास्थ्य कार्यकर्ता दूर-दराज़ के इलाक़ों में भी पहुँचने का भरसक प्रयास कर रहे हैं. भारत में पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि कुछ इलाक़ों में अभी तक स्वास्थ्यकर्मी नहीं पहुँच पाए हैं जबकि कई स्थानों पर लोग पोलियो की दवा बच्चों को दिलाने से हिचक रहे है. चिंता पोलिया का जड़ से सफाया करने के लिए ज़रूरी है कि सभी बच्चों को इसका टीका लगाया जाए अन्यथा कुछ बच्चों में छिपा वायरस तेज़ी से फैलने लगता है.
अफ्रीकी देश देश आइवरी कोस्ट में इस वर्ष पोलियो के 15 नए मामले सामने आए हैं लेकिन वहाँ चल रही लड़ाई के कारण टीकाकरण के कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था. इस वर्ष के अंत में मिस्र, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएँगे. लेकिन भविष्य में इस तरह के व्यापक कार्यक्रम चलाए जाने को लेकर संदेह की स्थिति पैदा हो गई है, वर्ष 2005 में टीकाकरण कार्यक्रम को चालू रखने के लिए लगभग दो करोड़ डॉलर की ज़रूरत होगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास यह रक़म फ़िलहाल नहीं है और आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर अगले वर्ष टीकाकरण का काम ठीक तरीक़े से नहीं हुआ तो वे बच्चे बड़ी संख्या में पोलियो के शिकार बन सकते हैं जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||