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हालात नहीं बदले तो फिर विद्रोह : महारा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में अंतिरम सरकार का गठन किया गया है जिसमें माओवादी भी शामिल हुए हैं लेकिन उनकी रणनीति क्या है और आगे वो क्या करने वाले हैं. इसी संबंध में बीबीसी हिंदी के राजेश जोशी ने बात की सूचना मंत्री कृष्ण बहादुर महारा से. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश सवाल- संविधान सभा के चुनाव के लिए क्या रणनीति है आप लोगों की. जवाब-देखिए, ये अंतरिम सरकार बनी हुई है. इसमें हम आठ पार्टी एकजुट हुए हैं. आज संसद में इन आठ पार्टियों के अलावा जो बाहर के दल हैं वे संकल्प लिए हैं. इन आठ पार्टी ने जो संकल्प लिया है अगर युद्ध स्तर पर काम हो तो बहुत अच्छी तरह संविधानसभा का चुनाव हो सकता है. हम चाहते हैं कि हमारी पार्टी और उनके बीच की एकता बनी रहे. हम कोशिश यही करेंगे और इसी तरह से काम करेंगे तो किसी भी तरह चुनाव हो जाएगा. सवाल- लेकिन इस बीच इस तरह की बातें सामने आ रही हैं कि आपके पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि अगर चीज़ें ठीक नहीं हुईं तो माओवादी फिर से हथियार उठा लेंगे और फिर से जनयुद्ध शुरू हो जाएगा क्या ये सच है? जवाब- ये बिल्कुल सच नहीं है. हमें और हमारे कार्यकर्ता को उत्तेजित करने की ये बात है. जो लोग देश में संविधान सभा का चुनाव नहीं चाहते हैं, आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन नहीं चाहते हैं और राजनीतिक परिवर्तन नहीं चाहते हैं ऐसे ही लोग इस तरह के दुष्प्रचार कर रहे हैं. हम शांतिपूर्ण तरीके से लेकिन राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की दृष्टि से दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते रहेंगे. सवाल- कैसा महसूस होता है, नेपाल सरकार की नज़रों में कल तक आप आतंकवादी थे, आपका नाम वेबसाइट में आतंकवादी के तौर पर दर्ज़ था. आज आप सरकार के मंत्री बन गए हैं क्या फ़क्र महसूस हो रहा है? जवाब- अब भी हमें जो लोग आतंकवादी कहते हैं हमें लगता है वे लोग सही नहीं सोच रहे हैं. हम शांतिपूर्ण राजनीति की धारा में आए हैं, लेकिन परिवर्तन की दृढ़ता के साथ. जो लोग परिवर्तन नहीं चाहते, देश को पुराने तरीके से ही चलाना चाहते हैं और देश में जो गरीबी, अभाव, बेरोजगारी रखना चाहते हैं वैसे लोग ऐसा सोच सकते हैं. हम आतंकवादी होने का जो लोग आरोप लगाते हैं, मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि अन्य किसी भी पार्टी की तुलना में आगे रहकर शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक परिवर्तन पर प्रतिबद्ध रहकर काम करेंगे. सवाल- अगर आपकी ये बात सफल नहीं हुई और मोनार्की वैसे-के वैसे रहे और राजा वैसा ही रहा और नेपाल में जनतंत्र के बजाय पुरानी व्यवस्था जैसी कोशिश होगी तो फिर आपका रास्ता क्या होगा? जवाब- आपने जिस प्रकार की व्यवस्था का जिक्र किया है वैसा ही रहे और हम कुछ न करेंगे तो भी नेपाली जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा फिर विद्रोह करेगा. अगर विद्रोह नेपाली जनता के पक्ष में, परिवर्तन के पक्ष में होगा तो हम भी उनका साथ देंगे. सवाल- यानि इस बार हथियारबंद संघर्ष चलाने में आप आगे नहीं होंगे आप पीछे से सहयोग करेंगे? जवाब- देखिए, इतिहास ने हमें आगे आने के लिए कहा और हम आगे आए. फिर अगर आने को कहेगा तो आगे आएँगे. सवाल- यानि आप इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि हथियार उठाने की ज़रूरत महसूस हुई तो पार्टी उससे पीछे नहीं हटेगी? जवाब- बिल्कुल, संविधानसभा स्वतंत्र तरीके से होगी तो हम अच्छी तरह से जाएंगे. हमें कुछ लोग पीछे धकेलने की कोशिश न करें हम यही अपील करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रचंड के बयान से संयुक्त राष्ट्र चिंतित13 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'हथियार नहीं 'बम' कहा था प्रचंड ने'14 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में राजशाही को लेकर झड़पें18 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में झड़पों के बाद कर्फ़्यू जारी22 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'माओवादी समर्थकों' की हत्या का विरोध23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादी शामिल होंगे सरकार में31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन टला31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों को मिली सत्ता में भागीदारी01 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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