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प्रचंड के बयान से संयुक्त राष्ट्र चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की सरकार में जल्दी ही शामिल होने जा रहे माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि अभी भी हज़ारों माओवादी लड़ाके कैंपों में नहीं हैं और हथियार जमा नहीं किए गए हैं. माओवादी नेता पुष्पकमल दहल यानी प्रचंड के इस बयान पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता ज़ाहिर की है. माओवादियों के हथियार छोड़ने के कार्यक्रम की निगरानी कर रहे संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वह इस बयान के संबंध में माओवादी नेताओं से सफ़ाई माँगेगा. उल्लेखनीय है कि नवंबर में हुए शांति समझौते के तहत माओवादियों ने अपने हथियार छोड़ने का वादा किया है. इसके तहत सभी माओवादी लड़ाकों को नेपाल भर में बनाए गए 28 कैंपों में चले जाना है और उनके हथियार कंटेनरों में जमा कर दिए जाने हैं. इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए संयुक्त राष्ट्र कर रहा है और उसने इसके लिए कई देशों से हथियार विशेषज्ञों को नेपाल में नियुक्त किया है. जनवरी के मध्य से संयुक्त राष्ट्र निगरानी समिति ने हथियार जमा करने शुरु किए थे. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि कुछ 21 हज़ार माओवादी लड़ाके कैंपों में आ चुके हैं लेकिन जमा किए गए हथियारों की संख्या इसके नौंवे हिस्से के बराबर है. इन आँकड़ों पर सरकार और नेपाली सेना ने संदेह जताया था. माओवादी इस अभियान के बाद भी हथियार लेकर सार्वजनिक समारोहों में दिखते रहे और हाल ही में संसद में मनोनीत एक सांसद के हथियार सहित संसद में जाने से हंगामा भी मचा था. लेकिन अब इन संदेहों को माओवादी नेता ने ख़ुद ही पुष्ट कर दिया है. पश्चिमी नेपाल में एक बयान में प्रचंड ने कहा है, "अभी भी हज़ारो माओवादी लड़ाके कैंपों में नहीं गए हैं और हथियार जमा नहीं करवाए गए हैं."
उनका कहना था, "ये हथियार इसलिए जमा नहीं करवाए गए हैं क्योंकि ये संयुक्त राष्ट्र के पैमाने पर खरे नहीं उतरते." उन्होंने कहा कि माओवादियों के पास हज़ारों लोग हैं जो अभी भी कई स्तरों पर हमले कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे शांति प्रक्रिया में बाधा नहीं पहुँचाना चाहते. उल्लेखनीय है कि पिछले साल जून में अज्ञातवास से लौटने के बाद से माओवादी नेता प्रचंड देश में लोकप्रिय नेता की तरह उभरे हैं और पूरे देश में पोस्टरों में उनकी तस्वीर दिखाई देती है. लेकिन हाल के उनके बयान ने विवाद पैदा किया है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि कम हथियार इसलिए जमा किए गए हैं क्योंकि ज़्यादातर या तो नदियों में बहा दिए गए या जला दिए गए. विरोध और चिंता प्रधानमंत्री गिरिजाप्रसाद कोइराला ने कहा है कि यदि माओवादी हथियार छोड़कर उन्हे जमा नहीं करते तो वे सरकार में शामिल नहीं हो सकेंगे. लेकिन माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि यदि इस हफ़्ते उन्हें सरकार में शामिल नहीं किया जाता तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे.
उधर संयुक्त राष्ट्र ने भी मीडिया में प्रचंड के बयानों पर चिंता ज़ाहिर की है. नेपाल में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के विशेष प्रतिनिधि इयान मार्टिन ने कहा है कि वे इस पर माओवादी नेताओं से सफ़ाई माँगेगे. उन्होंने चेतावनी दी है कि कैंपों के बाहर माओवादी लड़ाकों के हथियारों की रिपोर्ट की जाँच की जाएगी और यदि इसे सच पाया गया तो इसे शांति समझौते का उल्लंघन माना जाएगा और समझौते को भी अवैधानिक मान लिया जाएगा. संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति ने कहा है कि माओवादियों को अपने वायदे के मुताबिक़ अपने हथियार जमा करवा देने चाहिए. समिति ने कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास, चाहे वह माओवादी संगठन से हो या न हो. ऐसा हथियार है जिसका लाइसेंस नहीं है तो उसे पुलिस की जानकारी में लाया जाना चाहिए और जमा कर देना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रचंड दावे के सबूत पेश नहीं कर पाए10 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादी गतिविधियों पर चिंता22 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'माओवादी शिविर छोड़ काम पर निकले'21 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अब नहीं चलेगा राजा का सिक्का25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों की सामानांतर सरकार भंग18 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल के माओवादी विद्रोही अब संसद में15 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में अंतरिम संविधान पर सहमति16 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में निरस्त्रीकरण समझौता28 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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